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पहले हमला नहीं करते, लेकिन जवाब बेहद सख्त होगा

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पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और इजरायल को कड़ा संदेश दिया है। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश किसी पर पहले हमला नहीं करता, लेकिन अगर उस पर हमला किया गया तो जवाब बेहद सख्त और निर्णायक होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में युद्ध लगातार फैलता जा रहा है और कई देशों तक इसकी आंच पहुंच चुकी है।

राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि ईरान युद्ध का इच्छुक नहीं है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि यदि किसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए किया जाता है, तो उसे भी जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस संघर्ष को केवल सीमित दायरे में नहीं देख रहा, बल्कि पूरे क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

दरअसल, 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों और रणनीतिक स्थानों को निशाना बनाया, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया।

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह संघर्ष अब दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और इसमें नए-नए मोर्चे खुलते जा रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमले और खाड़ी देशों में ड्रोन व रॉकेट हमलों ने इस युद्ध को और जटिल बना दिया है।

इसके साथ ही कूटनीतिक स्तर पर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। ईरान ने बातचीत के लिए ‘विश्वास’ को जरूरी बताते हुए संकेत दिए हैं कि यदि अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो समाधान संभव है। हालांकि, जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं और दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह बयान एक तरह से रणनीतिक संदेश है—जिसमें वह खुद को रक्षात्मक दिखाते हुए भी मजबूत जवाब देने की चेतावनी दे रहा है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर न सिर्फ मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, ईरान के राष्ट्रपति का यह बयान इस बात का संकेत है कि स्थिति अभी शांत होने से काफी दूर है। अगर जल्द कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह युद्ध और अधिक देशों को अपनी चपेट में ले सकता है और वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ा सकता है।

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