
अमृतसर पुलिस का बड़ा खुलासा, ISI समर्थित दो आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त
पंजाब के अमृतसर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े दो कथित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान में कुल 9 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें 4 नाबालिग और 5 वयस्क शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इन मॉड्यूल का संचालन सीमा पार बैठे ISI हैंडलरों के निर्देश पर किया जा रहा था। जांच एजेंसियों के अनुसार, इनका उद्देश्य भारत में सुरक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना, युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित करना और संवेदनशील स्थानों की निगरानी कर आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देना था।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से एक मॉड्यूल रेलवे ट्रैक के पास कैमरे लगाकर वहां की गतिविधियों की निगरानी कर रहा था। आरोप है कि इन कैमरों से मिलने वाली जानकारी विदेशी हैंडलरों तक पहुंचाई जानी थी। जांच में यह भी सामने आया कि कैमरे लगाने और अन्य संसाधनों की व्यवस्था कथित तौर पर हवाला नेटवर्क के जरिए की गई थी। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान तीन अवैध पिस्तौल, नौ जिंदा कारतूस और पेट्रोल बम बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी बरामद की है।
जांच के दौरान एक और अहम जानकारी सामने आई कि दूसरे मॉड्यूल के कुछ सदस्य दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक विरोध प्रदर्शन में भी पहुंचे थे। पुलिस का आरोप है कि वहां उन्हें स्थानीय स्तर पर लॉजिस्टिक सहायता मिली थी, जिसमें पेट्रोल बम बनाने के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपियों को पुलिस और अन्य सुरक्षा प्रतिष्ठानों की रेकी करने तथा अवसर मिलने पर हमले की तैयारी करने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि पुलिस का दावा है कि समय रहते कार्रवाई होने के कारण किसी भी बड़ी साजिश को अंजाम नहीं दिया जा सका।
अमृतसर पुलिस आयुक्त ने बताया कि दोनों मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार छापेमारी और तकनीकी जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य संभावित सहयोगियों और विदेशी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस नेटवर्क की पहुंच किन-किन राज्यों तक थी और क्या इसके तार अन्य आतंकी संगठनों या मॉड्यूल से भी जुड़े हुए हैं।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा पार से संचालित आतंकी नेटवर्क अब सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और स्थानीय संपर्कों के जरिए युवाओं को अपने प्रभाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में समय रहते खुफिया सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई किसी बड़ी आतंकी घटना को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फिलहाल पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां पूरे मामले की विस्तृत जांच कर रही हैं और आरोपियों के डिजिटल रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन तथा विदेशी संपर्कों की गहन पड़ताल की जा रही है।



