
दिल्ली के जंतर-मंतर पर हटे बैरिकेड्स, महीनों बाद खुली सड़क
दिल्ली के जंतर-मंतर पर महीनों से लगी पाबंदियों के बाद अब आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। दिल्ली पुलिस ने यहां सड़क पर आवाजाही रोकने वाले बैरिकेड्स हटा दिए हैं। इसके साथ ही इस इलाके में यातायात और आम लोगों की आवाजाही पहले की तरह सामान्य होने की उम्मीद है। जंतर-मंतर लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब इसे आधिकारिक धरना-प्रदर्शन स्थल के रूप में अधिसूचित नहीं रखा गया है।
बैरिकेड्स हटाने का फैसला दिल्ली पुलिस कमिश्नर के उस आदेश के बाद लागू हुआ है, जिसके तहत जंतर-मंतर का अधिकृत प्रदर्शन स्थल का दर्जा खत्म कर दिया गया था। इस इलाके में पिछले कई महीनों से सुरक्षा और यातायात संबंधी प्रतिबंध लागू थे। स्थानीय निवासियों ने भी इन पाबंदियों के कारण होने वाली परेशानियों को लेकर अदालत का रुख किया था। उनका कहना था कि बैरिकेडिंग के चलते रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर की जगह अब प्रदर्शन के लिए तीन वैकल्पिक स्थान तय किए हैं। इनमें मध्य दिल्ली का रामलीला मैदान, उत्तर-पश्चिम दिल्ली का बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी ग्राउंड शामिल हैं। अब इन स्थानों पर निर्धारित नियमों और अनुमति के तहत धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जा सकेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को जगह उपलब्ध कराने के साथ-साथ राजधानी के व्यस्त इलाकों में यातायात और सुरक्षा व्यवस्था को संभालना है।
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाब में बताया है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल बनाए रखने के बजाय दूसरे स्थानों की पहचान करने का फैसला गृह मंत्रालय की ओर से गठित समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया। पुलिस के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस लंबे समय से विचार कर रहे थे। गृह मंत्रालय ने 26 अगस्त को समिति गठित की थी, जिसने जंतर-मंतर की स्थिति की समीक्षा कर वैकल्पिक स्थान सुझाए थे।
पुलिस ने अदालत को बताया कि जंतर-मंतर पर हर साल 1,300 से अधिक धरना-प्रदर्शन होते हैं, जबकि इस स्थान की अनुमानित क्षमता करीब 1,500 लोगों की है। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने से आसपास की सड़कों पर जाम लगता है और भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। पुलिस का यह भी कहना है कि प्रदर्शन के दौरान भीड़ जनपथ और कनॉट प्लेस की ओर फैल सकती है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ स्थानीय कारोबार भी प्रभावित होते हैं।
जवाब में आपातकालीन सेवाओं की परेशानी का भी जिक्र किया गया है। पुलिस के अनुसार, बड़े प्रदर्शनों के दौरान एंबुलेंस और दमकल गाड़ियों की आवाजाही बाधित हो सकती है। इसके अलावा आसपास सरकारी कार्यालयों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की मौजूदगी के कारण सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। पुलिस का तर्क है कि जंतर-मंतर को स्थायी प्रदर्शन स्थल बनाए रखने से आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक सुविधाओं पर असर पड़ता है।
हालांकि, जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल से हटाने के फैसले पर विरोध भी सामने आया है। कुछ संगठनों और याचिकाकर्ताओं ने इसे शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार से जुड़ा मुद्दा बताया है। उनका कहना है कि जंतर-मंतर की खास पहचान इसलिए रही है, क्योंकि यह देश की राजधानी में सत्ता के प्रमुख केंद्रों के नजदीक स्थित है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि नए प्रदर्शन स्थलों पर अनुमति और सुविधाओं की व्यवस्था किस तरह लागू की जाती है और इससे लोगों के विरोध दर्ज कराने के अधिकार पर क्या असर पड़ता है।



