
संसद के मानसून सत्र के दौरान राम मंदिर से जुड़े कथित घोटाले के मुद्दे पर राज्यसभा में जोरदार हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी द्वारा अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाए जाने पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष बिना ठोस तथ्यों के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषय को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। रिजिजू ने कहा कि संसद जैसे सर्वोच्च लोकतांत्रिक मंच पर धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों पर निराधार आरोप लगाना उचित नहीं है और विपक्ष को अपने बयानों के लिए माफी मांगनी चाहिए।
राज्यसभा में उस समय माहौल गर्म हो गया जब विपक्षी दलों ने शून्यकाल के दौरान राम मंदिर से जुड़े कथित घोटाले का मुद्दा उठाया। विपक्ष का आरोप था कि मंदिर निर्माण और दान राशि के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। विपक्षी सांसदों ने सरकार से इस मुद्दे पर जवाब मांगा और विस्तृत चर्चा की मांग की। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी लगातार ऐसे मुद्दे उठाकर जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है और उससे जुड़े मामलों में राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश दुर्भाग्यपूर्ण है। रिजिजू ने यह भी कहा कि यदि विपक्ष के पास कोई ठोस साक्ष्य हैं तो उन्हें संबंधित जांच एजेंसियों के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए, लेकिन संसद में केवल आरोप लगाकर माहौल खराब करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
विपक्ष का कहना है कि वह केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं का तर्क है कि यदि किसी भी सार्वजनिक या धार्मिक ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन पर सवाल उठते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर चर्चा से बचने का प्रयास कर रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को पूरी तरह राजनीतिक प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हाल के दिनों में राम मंदिर से जुड़े मुद्दे को लेकर विभिन्न विपक्षी नेताओं द्वारा विरोध प्रदर्शन और सांकेतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिस पर भारतीय जनता पार्टी ने कड़ी आपत्ति जताई थी। भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास कर रहा है, जबकि विपक्ष इसे लोकतांत्रिक तरीके से जवाबदेही तय करने की कोशिश बता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राम मंदिर का मुद्दा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। ऐसे में संसद के भीतर इस विषय पर होने वाली हर बहस राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जा रही है। फिलहाल इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और आने वाले दिनों में संसद के दोनों सदनों में इस विषय पर और अधिक राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।



