
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए आतंकी हमले की जांच में दिल दहला देने वाले नए तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार, हमलावर ने दो प्रवासी मजदूरों का भरोसा जीतने के लिए करीब 20 मिनट तक उनसे सामान्य बातचीत की। इस दौरान उसने उनके काम, घर-परिवार और निजी जानकारी के बारे में पूछा। जब दोनों मजदूर पूरी तरह सहज हो गए तो हमलावर ने उनसे पानी मांगा। जैसे ही मजदूर पानी देने के लिए आगे बढ़े, उसने अचानक पिस्तौल निकालकर उन पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की मौत हो गई। जांच एजेंसियों के अनुसार, हमले को बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया गया।
जांच में सामने आया है कि हमलावर की पहचान लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी लतीफ बट के रूप में की गई है। बताया जा रहा है कि वह ईंट-भट्ठे पर पहुंचा और मजदूरों के साथ सामान्य व्यक्ति की तरह घुलमिल गया। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जांच के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि उसने पहले मजदूरों का विश्वास हासिल किया ताकि किसी को उस पर शक न हो। इसके बाद अचानक हमला कर वह मौके से फरार हो गया। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बलों ने घेराबंदी कर व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया है।
इस आतंकी हमले के बाद दक्षिण कश्मीर में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के बीच भय का माहौल है। कई ईंट-भट्ठों और निर्माण स्थलों पर कामकाज प्रभावित हुआ है। मजदूरों के परिवार लगातार फोन कर उनकी सुरक्षा की जानकारी ले रहे हैं और कई श्रमिक अपने गृह राज्यों में लौटने पर विचार कर रहे हैं। स्थानीय प्रशासन ने प्रवासी मजदूरों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है, जबकि अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती भी की गई है। सुरक्षा एजेंसियां संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
घटना के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्र सरकार ने इस आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मृतक मजदूरों के परिजनों के लिए ₹10 लाख की अनुग्रह राशि की घोषणा की और कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों को हमलावरों का जल्द पता लगाने और उनके पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जांच इस पहलू पर भी की जा रही है कि हमले में किसी स्थानीय नेटवर्क ने आतंकियों की मदद तो नहीं की।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल दो मजदूरों को निशाना बनाने की घटना नहीं, बल्कि क्षेत्र में भय का माहौल पैदा करने की साजिश भी हो सकती है। हाल के वर्षों में प्रवासी मजदूरों पर इस तरह के हमले अपेक्षाकृत कम हुए थे, लेकिन कुलगाम की इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और खुफिया सूचनाओं के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही हैं। पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए आतंकियों की तलाश के लिए बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन जारी है और अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही हमले में शामिल सभी आरोपियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।



