
उत्तर अमेरिकी देश Mexico एक बार फिर हिंसा की आग में झुलस उठा है। कुख्यात ड्रग माफिया सरगना Nemesio Oseguera Cervantes उर्फ ‘एल मेंचो’ की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद हालात बेकाबू हो गए हैं। एल मेंचो देश के सबसे खतरनाक और प्रभावशाली आपराधिक संगठन Jalisco New Generation Cartel (CJNG) का प्रमुख था। उसकी मौत के बाद उसके समर्थकों और गिरोह के सदस्यों ने कई राज्यों में हिंसक प्रदर्शन शुरू कर दिए, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों ने एक गुप्त ऑपरेशन के तहत उसे घेरकर मार गिराया। एल मेंचो पर अमेरिका ने 15 मिलियन डॉलर का इनाम घोषित किया था और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधियों की सूची में शामिल था। उसकी अगुवाई में CJNG ने नशीले पदार्थों, खासकर फेंटानिल और कोकीन की तस्करी का विशाल नेटवर्क खड़ा किया था, जो अमेरिका और अन्य देशों तक फैला हुआ था।
मौत की खबर फैलते ही उसके समर्थकों ने कई शहरों में सड़कों पर उतरकर आगजनी, तोड़फोड़ और गोलीबारी शुरू कर दी। विशेष रूप से Jalisco, गुआनाजुआटो, मिचोआकान और तमाउलिपास जैसे राज्यों में हालात बेहद तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। उपद्रवियों ने बसों, ट्रकों और निजी वाहनों को आग के हवाले कर दिया, प्रमुख राजमार्गों को जाम कर दिया और सुरक्षा बलों पर हमला किया। कई स्थानों पर पुलिस और कार्टेल के गुर्गों के बीच घंटों तक मुठभेड़ चलती रही।
स्थानीय प्रशासन ने कई इलाकों में आपातकाल जैसे हालात घोषित कर दिए हैं। स्कूलों और दफ्तरों को बंद कर दिया गया है, सार्वजनिक परिवहन सेवाएं रोक दी गई हैं और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है। कुछ शहरों में हवाई उड़ानों पर भी असर पड़ा है। बाजार और व्यावसायिक गतिविधियां ठप पड़ गई हैं, जिससे आर्थिक नुकसान की आशंका बढ़ गई है।
विश्लेषकों का मानना है कि एल मेंचो की मौत से ड्रग नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, लेकिन इसके साथ ही कार्टेल के अंदर सत्ता संघर्ष भी तेज हो सकता है। संभावना है कि संगठन के भीतर नए नेतृत्व को लेकर खूनी संघर्ष छिड़े, जिससे आने वाले दिनों में हिंसा और बढ़ सकती है।
मेक्सिको सरकार ने साफ किया है कि वह संगठित अपराध के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखेगी और देश में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सैन्य कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है; इसके लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्तर पर व्यापक सुधारों की भी जरूरत है।
फिलहाल देश में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है, लेकिन हालात कब पूरी तरह नियंत्रण में आएंगे, यह कहना मुश्किल है। आम नागरिक दहशत में हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।



