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प्रधानमंत्री मोदी की नई रील ने युवाओं से की खास अपील

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) से पहले सोशल मीडिया पर एक नई रील साझा कर देशवासियों, खासकर युवाओं से भारतीय हैंडलूम उत्पादों को अपनाने की अपील की है। अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे लोग सोशल मीडिया पर नए ट्रेंड्स और “Get Ready With Me (GRWM)” जैसे वीडियो बनाकर साझा करते हैं, उसी तरह भारतीय हथकरघा उत्पादों को भी लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे कम से कम एक हैंडलूम उत्पाद खरीदें, उसे पहनें और उसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करें, ताकि भारत के बुनकरों और पारंपरिक हस्तकरघा उद्योग को नई पहचान मिल सके।

प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि 7 अगस्त को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय हथकरघा दिवस केवल एक औपचारिक दिवस नहीं, बल्कि देश के लाखों बुनकरों की मेहनत, कला और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का अवसर है। उन्होंने लोगों से भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को दुनिया भर में लोकप्रिय बनाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया आज युवाओं तक तेजी से पहुंचने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है और यदि युवा इस अभियान से जुड़ते हैं तो भारतीय हैंडलूम को वैश्विक पहचान दिलाने में बड़ी मदद मिल सकती है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य देश के हथकरघा उद्योग, बुनकरों और पारंपरिक वस्त्र निर्माण से जुड़े कारीगरों के योगदान को सम्मान देना है। इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी और इसकी तिथि 1905 के स्वदेशी आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई है। इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकारें विभिन्न कार्यक्रमों, प्रदर्शनियों और जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित करती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का हथकरघा उद्योग देश की सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था का भी महत्वपूर्ण आधार है। लाखों बुनकर और कारीगर इस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और उनकी आजीविका काफी हद तक स्थानीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में उत्पादों की मांग पर निर्भर करती है। हाल के वर्षों में केंद्र सरकार लगातार ‘वोकल फॉर लोकल’, ‘मेक इन इंडिया’ और भारतीय वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने से जुड़े अभियानों के माध्यम से इस क्षेत्र को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। सरकार ने बुनकरों की आय बढ़ाने, नई तकनीक उपलब्ध कराने और वैश्विक बाजार तक उनकी पहुंच मजबूत करने के लिए भी कई पहलें शुरू की हैं।

प्रधानमंत्री की इस नई रील को सोशल मीडिया पर तेजी से प्रतिक्रिया मिल रही है। बड़ी संख्या में लोग इसे साझा कर रहे हैं और कई उपयोगकर्ताओं ने भारतीय हथकरघा से बने कपड़ों और उत्पादों के साथ अपने वीडियो भी पोस्ट करने शुरू कर दिए हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह अभियान व्यापक जनभागीदारी हासिल करता है तो इससे न केवल भारतीय हैंडलूम उत्पादों की मांग बढ़ेगी, बल्कि देश के पारंपरिक बुनकर समुदाय को आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। डिजिटल युग में पारंपरिक कला और आधुनिक सोशल मीडिया के इस मेल को भारतीय हस्तकरघा उद्योग के लिए एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

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