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NEET री-एग्जाम में सॉल्वर गैंग का बड़ा खुलासा

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बिहार में NEET री-एग्जाम को लेकर एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। लखीसराय पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे संगठित सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश हुआ है, जो कथित तौर पर पैसे लेकर अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दिलाने और मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने का दावा करता था। इस मामले में अब तक 24 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें मेडिकल छात्र, कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोग और परीक्षा से संबंधित नेटवर्क के अन्य सदस्य शामिल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई ने एक बार फिर देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियों को परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़ी कुछ संदिग्ध सूचनाएं मिली थीं। इसके बाद लखीसराय और आसपास के इलाकों में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया गया। जांच के दौरान पुलिस को ऐसे सबूत मिले, जिनसे संकेत मिला कि कुछ लोग अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर परीक्षा में अनुचित तरीके से सफलता दिलाने का वादा कर रहे थे। पुलिस का दावा है कि यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और इसमें कई स्तरों पर लोग शामिल थे।

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों में कुछ मेडिकल छात्र भी शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि इन छात्रों का इस्तेमाल सॉल्वर के रूप में किया जाता था या फिर वे अभ्यर्थियों और गिरोह के बीच संपर्क स्थापित करने का काम करते थे। प्रारंभिक पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिनके आधार पर पुलिस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल स्थानीय स्तर का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके तार दूसरे जिलों और राज्यों तक भी जुड़े हो सकते हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की है। जांच एजेंसियां इन उपकरणों की फोरेंसिक जांच करा रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा में गड़बड़ी की योजना किस तरह बनाई गई थी और इसमें कितने लोग शामिल थे। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या गिरोह ने किसी अभ्यर्थी को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने या पहचान बदलने जैसी गतिविधियों में भी भूमिका निभाई थी।

इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा जगत और अभिभावकों में चिंता बढ़ गई है। पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और अन्य अनियमितताओं के कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षा में फिर से धोखाधड़ी के आरोपों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर बहस छेड़ दी है। हालांकि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने हाल के वर्षों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, AI आधारित निगरानी और सख्त पहचान जांच जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं, फिर भी ऐसे मामलों का सामने आना चिंता का विषय माना जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह कितने समय से सक्रिय था, कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया था और इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है। यदि जांच में बड़े खुलासे होते हैं तो यह मामला देश की प्रमुख परीक्षा धोखाधड़ी घटनाओं में से एक बन सकता है।

फिलहाल बिहार पुलिस और EOU इस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हुई हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता से कोई समझौता न हो और मेहनत करने वाले छात्रों का विश्वास बना रहे।

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