
केरल विधानसभा चुनाव के बीच सियासी माहौल तेजी से गरमाता जा रहा है और इसी कड़ी में रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने एर्नाकुलम जिले के परवूर में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सत्तारूढ़ Left Democratic Front (LDF) और विपक्षी United Democratic Front (UDF) पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों ही गठबंधन दशकों से केरल की जनता को गुमराह करते आ रहे हैं और राज्य को विकास के बजाय भ्रष्टाचार और विभाजन की राजनीति में उलझाए रखा है।
रैली में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि केरल की राजनीति में LDF और UDF सिर्फ नाम के अलग हैं, लेकिन काम और नीतियों में दोनों एक जैसे हैं। उन्होंने दावा किया कि इन दोनों गठबंधनों ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया, समाज को बांटा और जनता से किए गए वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है जब केरल की जनता इन पारंपरिक राजनीतिक विकल्पों से आगे बढ़कर नए विकल्प पर विचार करे।
अपने भाषण में राजनाथ सिंह ने सबरीमाला से जुड़े मुद्दे का भी जिक्र किया और LDF सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि “भगवान भी केरल में सुरक्षित नहीं हैं”, और यह बयान उन्होंने सबरीमाला से जुड़े सोने के मामले को लेकर दिया। इस दौरान उन्होंने LDF पर धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और इसे जनता की भावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बताया।
इसके अलावा, उन्होंने UDF पर भी निशाना साधते हुए कई पुराने घोटालों का जिक्र किया और कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यह गठबंधन भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और अविश्वसनीय राजनीति का प्रतीक बन चुका है। राजनाथ सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि LDF का मतलब “लूट, डिवीजन और फेल्योर” है, जबकि UDF “अनट्रस्टवर्दी और फ्रॉड” की राजनीति का प्रतिनिधित्व करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, केरल में लंबे समय से LDF और UDF के बीच सत्ता का सीधा मुकाबला रहा है, लेकिन इस बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। ऐसे में चुनावी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।
कुल मिलाकर, राजनाथ सिंह का यह बयान केरल के चुनावी माहौल को और अधिक गरमा सकता है। जहां एक तरफ BJP खुद को तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है, वहीं LDF और UDF के बीच पारंपरिक मुकाबला भी अपने चरम पर है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या इस बार केरल की जनता राजनीतिक समीकरण बदलती है या फिर वही पुराना पैटर्न कायम रहता है।



