
मध्य पूर्व में जारी तनाव और होरमुज़ जलडमरूमध्य पर बढ़ते सैन्य टकराव ने अब वैश्विक स्तर पर खाद (फर्टिलाइज़र) आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर दिया है। इस संकट ने दुनिया भर में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई आशंकाएं पैदा कर दी हैं, क्योंकि उर्वरक की कमी सीधे कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर असर डाल सकती है।
दरअसल, होरमुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल, गैस और उर्वरक का बड़ा हिस्सा गुजरता है। मौजूदा संकट के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया के कुल उर्वरक व्यापार का बड़ा हिस्सा—करीब 30% से अधिक—इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इसके अलावा खाड़ी देशों से निकलने वाली यूरिया, अमोनिया और सल्फर जैसी जरूरी सामग्री भी इसी रास्ते से सप्लाई होती है। ऐसे में इस मार्ग के बाधित होने से वैश्विक स्तर पर उर्वरकों की भारी कमी का खतरा पैदा हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि उर्वरकों की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरिया की कीमतों में पहले ही 50% तक की वृद्धि हो चुकी है। इसका सीधा असर किसानों की लागत पर पड़ेगा और कई देशों में किसान उर्वरकों का कम इस्तेमाल करने को मजबूर हो सकते हैं। इस संकट की जड़ में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा सैन्य संघर्ष है, जिसके चलते ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। इसके जवाब में अमेरिका ने भी क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं, जिससे हालात और जटिल हो गए हैं।
ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संकट ने केवल तेल आपूर्ति ही नहीं बल्कि खाद और कृषि से जुड़े जरूरी संसाधनों की सप्लाई को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। वैश्विक स्तर पर उर्वरक शिपमेंट में रुकावट के कारण कई देशों में खेती पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए यह स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है, जहां किसान पहले से ही महंगे इनपुट्स और सीमित संसाधनों से जूझ रहे हैं।
अगर उर्वरक की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित रहती है, तो आने वाले वर्षों में अनाज उत्पादन में गिरावट और खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भी चेतावनी दी है कि यदि यह संकट जारी रहा, तो दुनिया भर में भूख और खाद्य असुरक्षा बढ़ सकती है।
पहले से ही लाखों लोग खाद्य संकट का सामना कर रहे हैं, और इस स्थिति के और बिगड़ने की आशंका है। विश्लेषकों का मानना है कि यह संकट केवल एक क्षेत्रीय समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा खतरा है। यदि जल्द ही इस मार्ग को फिर से खोला नहीं गया, तो आने वाले समय में यह संकट और गहरा सकता है।



