
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने जानकारी दी है कि तेल और एलपीजी लेकर जा रहे 10 भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर निकल चुके हैं। सरकार ने साफ कहा है कि भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और देश में किसी तरह की कमी या अतिरिक्त टैक्स लगाने की स्थिति नहीं है।
दरअसल, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़े सैन्य तनाव के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट पर संकट गहरा गया था। इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से में कच्चा तेल और गैस की सप्लाई होती है। हालात बिगड़ने के बाद कई देशों को ईंधन संकट का डर सताने लगा था। भारत के भी कई जहाज इस इलाके में फंसे हुए थे, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।
शिपिंग, पोर्ट्स और जलमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि भारतीय नौसेना और संबंधित एजेंसियों की निगरानी में भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिया गया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को होर्मुज से गुजरने के लिए किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क या टैक्स नहीं देना पड़ा है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में लगाए जा रहे अतिरिक्त चार्ज के दावों को सरकार ने पूरी तरह गलत बताया।
केंद्र सरकार के अनुसार देश में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और पेट्रोल पंपों पर सप्लाई सामान्य बनी हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की घबराहट में जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीदने से बचें। सरकार का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक सप्लाई रूट भी तैयार हैं।
सूत्रों के मुताबिक हाल के दिनों में कुछ एलपीजी टैंकरों को विशेष सुरक्षा के साथ भारत लाया गया। महाराष्ट्र के देवगढ़ पोर्ट पर एक बड़ा एलपीजी जहाज सुरक्षित पहुंचा, जिससे घरेलू गैस सप्लाई को और मजबूती मिली है। कंपनियों का कहना है कि हालात सामान्य होने के साथ आने वाले दिनों में एलपीजी कीमतों में राहत भी देखने को मिल सकती है।
सरकार ने यह भी बताया कि होर्मुज क्षेत्र में मौजूद भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय की 24 घंटे चलने वाली कंट्रोल रूम टीम लगातार जहाजों और उनके क्रू से संपर्क में है। अब तक सैकड़ों भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है।
प्रधानमंत्री Narendra Modi भी इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भारत ने ईरान और खाड़ी देशों के साथ राजनयिक स्तर पर बातचीत तेज कर दी है ताकि समुद्री व्यापार और ऊर्जा सप्लाई बाधित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने समय रहते रणनीतिक तैयारी करके संभावित ऊर्जा संकट को काफी हद तक टाल दिया है।
हालांकि वैश्विक स्तर पर हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल आ सकता है। फिलहाल केंद्र सरकार लगातार यह भरोसा दिला रही है कि आम लोगों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है।



