
तेलंगाना में नकली भारतीय करेंसी तैयार करने वाले एक गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। हैदराबाद में पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर कथित तौर पर नकली नोट तैयार करने और उन्हें बाजार में चलाने का आरोप है। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने नकली नोट बनाने की तकनीक किसी प्रोफेशनल ट्रेनिंग से नहीं, बल्कि YouTube और Instagram जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से सीखी थी। पुलिस की कार्रवाई ने यह भी उजागर किया है कि इंटरनेट पर मौजूद गलत और गैरकानूनी जानकारी का इस्तेमाल किस तरह अपराध के लिए किया जा सकता है।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में ऐसे लोग शामिल हैं जो सामान्य नौकरी और रोजमर्रा के काम करते थे। इनमें एक आरोपी Zomato डिलीवरी बॉय और दूसरा Rapido ड्राइवर बताया गया है। आरोप है कि इन लोगों ने सोशल मीडिया पर नकली नोट तैयार करने से जुड़े वीडियो और जानकारी देखी और फिर उसी आधार पर नकली करेंसी तैयार करने की कोशिश शुरू कर दी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं और नकली नोटों को बाजार में खपाने का नेटवर्क कितना बड़ा था।
जांच के दौरान पुलिस को नकली नोट तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तैयार नकली नोट बरामद होने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों ने असली नोट जैसी दिखने वाली करेंसी तैयार करने के लिए कागज, प्रिंटिंग और दूसरी सामग्री का इस्तेमाल किया। गांधी जी की तस्वीर और नोट पर दिखाई देने वाले कुछ सुरक्षा चिह्नों की नकल करने की कोशिश की गई थी। हालांकि नकली नोटों की गुणवत्ता असली करेंसी के मुकाबले कमजोर बताई जा रही है और पुलिस का कहना है कि इन्हें पहचानने के लिए विशेषज्ञ जांच भी कराई जा रही है।
मामले की शुरुआत पुलिस को मिली सूचना के बाद हुई। इसके बाद पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी और जांच को आगे बढ़ाया। आरोपियों तक पहुंचने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में सोशल मीडिया से नकली नोट बनाने की जानकारी हासिल करने की बात सामने आने के बाद पुलिस ने इस पूरे नेटवर्क की तकनीकी और वित्तीय कड़ियों की जांच शुरू कर दी है।
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि आरोपियों ने नकली करेंसी बनाने की जानकारी इंटरनेट से हासिल की। YouTube और Instagram जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद किसी भी जानकारी को बिना समझे या जांचे इस्तेमाल करना कितना खतरनाक हो सकता है, यह घटना उसका उदाहरण है। हालांकि इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी अपराध के लिए नहीं होती, लेकिन कुछ लोग गलत जानकारी या आपराधिक गतिविधियों से जुड़ी सामग्री का इस्तेमाल गैरकानूनी कामों के लिए कर सकते हैं।
पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने नकली नोटों को कहां-कहां चलाने की कोशिश की। क्या उन्होंने खुद इन नोटों का इस्तेमाल किया या किसी दूसरे नेटवर्क को सप्लाई की, यह भी जांच का अहम हिस्सा है। अगर नकली नोट बड़ी संख्या में बाजार में पहुंचाए गए हैं, तो पुलिस को उनके सर्कुलेशन और उनसे जुड़े दूसरे लोगों का पता लगाने के लिए अलग से जांच करनी होगी।
जांच एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन और डिजिटल गतिविधियों की भी पड़ताल कर सकती हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने किन अकाउंट्स और वीडियो को देखा, किन लोगों से संपर्क किया और नकली नोट तैयार करने के बाद किन लोगों के साथ संपर्क में रहे, इन सभी पहलुओं से कथित नेटवर्क की जानकारी मिल सकती है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह काम पहली बार किया गया था या आरोपी पहले से नकली करेंसी तैयार और इस्तेमाल कर रहे थे।
नकली करेंसी का बाजार में पहुंचना अर्थव्यवस्था और आम लोगों दोनों के लिए गंभीर समस्या है। अगर कोई व्यक्ति बिना जानकारी के नकली नोट स्वीकार कर लेता है, तो बाद में उसे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। दुकानदारों, छोटे कारोबारियों और रोजाना नकद लेनदेन करने वाले लोगों के लिए नकली नोटों की पहचान करना इसलिए बेहद जरूरी है।
हैदराबाद पुलिस की इस कार्रवाई ने यह भी दिखाया है कि नकली करेंसी के खिलाफ जांच अब सिर्फ प्रिंटिंग प्रेस या बड़े संगठित गिरोहों तक सीमित नहीं है। छोटे स्तर पर काम करने वाले लोग भी डिजिटल प्लेटफॉर्म से जानकारी लेकर इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि उनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क या आर्थिक मदद करने वाला व्यक्ति तो नहीं था।
फिलहाल 3 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच जारी है। पुलिस बरामद नकली नोटों और सामग्री की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने कितनी नकली करेंसी तैयार की तथा उसे कहां-कहां चलाया। आगे की जांच में इस कथित फर्जी करेंसी नेटवर्क से जुड़े और नाम सामने आने की संभावना है।
यह मामला एक बड़ी चेतावनी भी है कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री का गलत इस्तेमाल अपराध को बढ़ावा दे सकता है। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि आरोपियों ने कथित तौर पर नकली नोट बनाने की शुरुआत कैसे की, उनका मकसद क्या था और इस पूरे मामले में उनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए थे।



