फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा — बढ़ाएंगे परमाणु हथियारों की संख्या, बदलेगी न्यूक्लियर डिटरेंस नीति
पेरिस — **फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा है कि फ्रांस अपनी परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रहा है और साथ ही अपनी परमाणु नीतियों (nuclear doctrine) में बड़ा बदलाव करेगा। यह बात उन्होंने फ्रांस के ब्रीटनी स्थित न्यूक्लियर सबमरीन बेस ‘आईल लोंग’ से कही, जहां उन्होंने वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और बढ़ते संघर्षों को देखते हुए अपने देश की न्यूक्लियर डिटरेंस (nuclear deterrence) रणनीति को सख्त करने पर जोर दिया।
मैक्रों ने कहा कि विश्व में वर्तमान समय में सुरक्षा जोखिम गहराते जा रहे हैं और ऐसे हालात में फ्रांस को अपना परमाणु हथियार भंडार बढ़ाकर मजबूत करना आवश्यक है, ताकि किसी भी संभावित खतरे का सामना राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण से बेहतर तरीके से किया जा सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फ्रांस अपने परमाणु निर्णय लेने की सर्वोच्च अधिकारिता राष्ट्रपति के पास ही रखेगा और किसी अन्य देश के साथ यह अधिकार साझा नहीं करेगा।
राष्ट्रपति मैक्रों ने यह घोषणा ऐसे समय में की है जब मध्य पूर्व में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाईें जारी हैं, और यूरोप में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से यूरोप अमेरिका पर अपनी रक्षा का भरोसा करता आया है, लेकिन अब समय आ गया है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा क्षमता को और मजबूत करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
मैक्रों ने बताया कि फ्रांस न केवल अपनी सेना और रक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा, बल्कि वह यूरोपीय सहयोग को भी बढ़ावा देगा, जिसमें जर्मनी, पोलैंड, नीदरलैंड, बेल्जियम और डेनमार्क जैसे देशों को शामिल कर “एडवांस्ड डिटरेंस” की एक नई रणनीति तैयार की जाएगी। इसके तहत संभवतः इन देशों के साथ संयुक्त न्यूक्लियर युद्धाभ्यास (war games) और रणनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाया जा सकता है। हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि निर्णय-निर्माण की अंतिम जिम्मेदारी हमेशा फ्रांसीसी राष्ट्रपति के पास ही रहेगी।
इस नई नीति का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा “फॉरवर्ड डिटरेंस” या अग्रिम प्रतिरोध सिद्धांत है, जिसके तहत फ्रांस अपने रणनीतिक न्यूक्लियर संसाधनों को आवश्यक परिस्थितियों में अन्य यूरोपीय देशों में अस्थायी तौर पर स्थापित करने का विकल्प भी देख रहा है। इससे यूरोप के रक्षा ढांचे को अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा और संभावित खतरों के प्रति प्रतिक्रिया समय को कम किया जा सकेगा।
मैक्रों के इस बयान ने यूरोपीय सुरक्षा एवं वैश्विक रणनीति के परिदृश्य में बड़ी हलचल मचा दी है। दुनिया भर के सुरक्षा विश्लेषक इसे फ्रांस की बढ़ती महत्वाकांक्षा और यूरोप की सुरक्षा स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं। इससे पहले, अमेरिका के सैन्य सहयोग पर यूरोप की निर्भरता बनी हुई थी, लेकिन वर्तमान वैश्विक तनाव के चलते यूरोप को अपनी रक्षा क्षमताओं को आत्म-निर्भर बनाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।
यह निर्णय शीत युद्ध के बाद से यूरोप में रक्षा नीति में सबसे बड़ा बदलाव भी माना जा रहा है क्योंकि अब फ्रांस अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ाकर यूरोपीय सुरक्षा फ्रेमवर्क में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है। इससे रूस, चीन और अन्य देशों के बढ़ते प्रभाव के बीच यूरोपीय सुरक्षा को एक नया आयाम मिलेगा।
विश्लेषकों का मानना है कि फ्रांस की यह पहल वैश्विक सुरक्षा संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है, और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु हथियारों के विस्तार तथा नियंत्रण संबंधी अध्यादेशों पर बहस को फिर से तेज़ कर सकती है। ऐसे में मैक्रों की घोषणा यह संकेत देती है कि विश्व राजनीति में शक्ति और स्वतंत्रता को बरकरार रखने के लिए अब राष्ट्रीय नीतियों को बदलना अनिवार्य हो गया है।
इस घोषणा के बाद फ्रांस तथा यूरोपीय देशों के भविष्य के रणनीतिक सहयोग और सुरक्षा नीति में व्यापक बदलावों की उम्मीद जताई जा रही है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे एक नए सुरक्षा युग के पहले चरण के रूप में देख रहा है।


