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एशियन गेम्स में 17 मेडल, सिर्फ 1 गोल्ड

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जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 24 सितंबर तक कुल 17 पदक अपने नाम किए हैं, लेकिन इनमें सिर्फ एक स्वर्ण पदक है। भारत के खाते में 7 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज भी हैं। मौजूदा मेडल टैली में भारत शीर्ष देशों से पीछे है। चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश गोल्ड मेडल के मामले में भारत से काफी आगे चल रहे हैं।

भारत का इकलौता गोल्ड अब तक महिला क्रिकेट टीम ने जीता है। टीम ने श्रीलंका को हराकर लगातार दूसरी बार एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक हासिल किया। इसके बाद भारतीय खिलाड़ियों ने अलग-अलग खेलों में सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जरूर जीते हैं, लेकिन गोल्ड की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी अभी देखने को नहीं मिली है। हालांकि, प्रतियोगिता अभी जारी है और भारत के कई मुकाबले बाकी हैं, इसलिए अंतिम मेडल टैली आने से पहले पूरे प्रदर्शन का आकलन करना जल्दबाजी होगा।

नागोया गेम्स में भारत के प्रदर्शन की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि इन खेलों की तैयारी पर सरकार ने बड़ी रकम खर्च की है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, एशियन गेम्स की तैयारी के दौरान Annual Calendar for Training and Competition यानी ACTC के तहत 702.86 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके अलावा Target Olympic Podium Scheme यानी TOPS के जरिए 97.84 करोड़ रुपये खर्च हुए। दोनों को मिलाकर यह रकम करीब 800.70 करोड़ रुपये बैठती है।

इस खर्च का बड़ा हिस्सा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा दिलाने पर गया। आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर पर करीब 251.4 करोड़ रुपये खर्च किए गए। घरेलू ट्रेनिंग के लिए 118.3 करोड़ रुपये, विदेशी विशेषज्ञों के लिए 86.3 करोड़ रुपये और खेल उपकरणों के लिए 89.2 करोड़ रुपये खर्च हुए। विदेश में ट्रेनिंग पर करीब 39.8 करोड़ रुपये खर्च किए गए। सरकार की तैयारी में खिलाड़ियों के साथ डॉक्टरों, फिजियोथेरेपिस्ट, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अन्य सपोर्ट स्टाफ को भी शामिल किया गया है।

भारत इस बार 36 खेलों में 501 खिलाड़ियों के दल के साथ एशियन गेम्स में उतरा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस दल में बड़ी संख्या में ऐसे खिलाड़ी हैं जो पहली बार एशियन गेम्स में हिस्सा ले रहे हैं। टीम के साथ 265 सदस्यीय सपोर्ट स्टाफ भी है। इससे साफ है कि तैयारी को केवल मौजूदा प्रतियोगिता तक सीमित रखने के बजाय युवा खिलाड़ियों और भविष्य की टीम तैयार करने पर भी जोर दिया गया है।

भारत के लिए पिछला एशियन गेम्स अभियान बेहद सफल रहा था। 2023 के हांगझोउ एशियन गेम्स में भारत ने पहली बार 100 पदकों का आंकड़ा पार करते हुए कुल 106 मेडल जीते थे। इनमें 28 गोल्ड, 38 सिल्वर और 40 ब्रॉन्ज शामिल थे। भारत उस प्रतियोगिता में चौथे स्थान पर रहा था। इसी प्रदर्शन के बाद भारतीय खेलों से एशियन गेम्स में लगातार बड़े पदक आंकड़े की उम्मीद बढ़ी है।

हांगझोउ में भारत की सफलता में शूटिंग और एथलेटिक्स की अहम भूमिका रही थी। शूटिंग से भारत को 22 पदक मिले थे, जबकि एथलेटिक्स ने 29 पदक दिलाए थे। दोनों खेलों ने मिलकर कई स्वर्ण पदक भी दिलाए। नागोया में शुरुआती दौर में इन खेलों से मिलने वाले पदकों की प्रकृति और संख्या पर नजर बनी हुई है। यही वजह है कि इस बार सिर्फ कुल पदकों की संख्या नहीं, बल्कि अलग-अलग खेलों में गोल्ड जीतने की क्षमता पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

हालांकि, 17 पदकों को केवल निराशाजनक प्रदर्शन के तौर पर देखना भी सही नहीं होगा। प्रतियोगिता अभी खत्म नहीं हुई है और आने वाले दिनों में एथलेटिक्स, शूटिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन समेत कई खेलों में भारत के पास पदक जीतने के मौके हैं। मौजूदा स्थिति अंतिम परिणाम नहीं है। लेकिन 24 सितंबर तक सिर्फ एक गोल्ड मिलने से यह सवाल जरूर सामने आया है कि बड़े निवेश और लंबे प्रशिक्षण कार्यक्रम का फायदा भारत को स्वर्ण पदकों में कितना मिल पा रहा है।

मौजूदा मेडल टैली में चीन सबसे आगे है, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया भी भारत से काफी ऊपर हैं। 24 सितंबर के बाद उपलब्ध आंकड़ों में भारत 17 पदकों के साथ 15वें स्थान पर था। चीन के पास उस समय 80 गोल्ड समेत 130 पदक, जापान के पास 20 गोल्ड समेत 91 और दक्षिण कोरिया के पास 10 गोल्ड समेत 50 पदक थे। इससे एशिया की शीर्ष खेल शक्तियों और भारत के बीच गोल्ड मेडल के मामले में अंतर साफ दिखाई देता है।

एशियन गेम्स में भारत का मौजूदा प्रदर्शन आगे की बड़ी प्रतियोगिताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। 2026 का यह आयोजन खिलाड़ियों को मजबूत एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ मुकाबले का अनुभव दे रहा है और युवा खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करने का मौका है। सरकार की ओर से की गई तैयारी का बड़ा हिस्सा भी इसी लंबे खेल चक्र को ध्यान में रखकर किया गया है। इसलिए नागोया में अंतिम पदक तालिका के साथ-साथ यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि कितने नए खिलाड़ी मजबूत प्रदर्शन के साथ उभरकर सामने आते हैं और किन खेलों में भारत अपनी पदक जीतने की क्षमता को और व्यापक कर पाता है।

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