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भिवंडी में चार मंजिला इमारत ढही, कई लोगों की मौत

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महाराष्ट्र के ठाणे जिले के भिवंडी शहर में शुक्रवार तड़के एक बड़ा हादसा हो गया, जब एक चार मंजिला रिहायशी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, दमकल विभाग, पुलिस, आपदा प्रबंधन दल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें मौके पर पहुंच गईं और तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। शुरुआती रिपोर्टों में 5 से 6 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन समय बीतने के साथ बचाव अभियान के दौरान मृतकों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई।

यह हादसा भिवंडी के बालाजी नगर-गंगारामवाड़ी इलाके स्थित ‘कोहिनूर’ नामक इमारत में हुआ। अधिकारियों के अनुसार यह इमारत लगभग 12 से 14 वर्ष पुरानी थी और पहले ही इसे जर्जर एवं खतरनाक घोषित किया जा चुका था। बताया गया कि भवन के खंभों की मरम्मत का कार्य चल रहा था। स्थानीय प्रशासन ने इमारत को खाली करने के लिए पहले नोटिस भी जारी किया था, लेकिन मरम्मत के दौरान कुछ लोग अपना सामान निकालने या अन्य कारणों से भवन के अंदर मौजूद थे। इसी दौरान पूरी इमारत अचानक ढह गई और कई लोग मलबे में दब गए।

हादसे के तुरंत बाद बचाव दलों ने जेसीबी मशीनों, हाइड्रोलिक उपकरणों और अन्य आधुनिक संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का काम शुरू किया। राहत कार्य के दौरान कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, जबकि कई शव भी बरामद किए गए। बचाव अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है क्योंकि मलबे का बड़ा हिस्सा एक-दूसरे पर दबा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक पूरे मलबे की तलाशी पूरी नहीं हो जाती, तब तक फंसे लोगों की वास्तविक संख्या के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकती।

प्रशासन के अनुसार राहत कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। घटनास्थल के आसपास सुरक्षा घेरा बना दिया गया है ताकि बचाव अभियान में किसी प्रकार की बाधा न आए। घायलों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज जारी है। अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।

इस घटना ने एक बार फिर पुराने और जर्जर भवनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भिवंडी और मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसी इमारतें मौजूद हैं जिन्हें खतरनाक घोषित किया जा चुका है, लेकिन उनमें अब भी लोग रह रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय रहते ऐसे भवनों को खाली कराना और पुनर्वास की प्रभावी व्यवस्था करना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन ने संकेत दिया है कि हादसे के कारणों की विस्तृत जांच कराई जाएगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे इलाके में राहत एवं बचाव अभियान युद्धस्तर पर जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। जैसे-जैसे अभियान आगे बढ़ रहा है, मृतकों और घायलों की संख्या में बदलाव की संभावना बनी हुई है। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया है।

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