
बिहार में लगातार बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के कारण बाढ़ का संकट एक बार फिर गंभीर होता जा रहा है। राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक, गंगा, करमनासा, बूढ़ी गंडक, कोसी और सोन जैसी नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में प्रशासन और ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। बिहार के आधिकारिक बाढ़ निगरानी आंकड़ों के अनुसार 3 सितंबर की सुबह गंडक, करमनासा, गंगा, बूढ़ी गंडक, कोसी और सोन समेत कई नदियां अपने संबंधित निगरानी स्थलों पर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गईं।
सबसे ज्यादा चिंता गंडक नदी के बढ़ते कटाव को लेकर है। पश्चिम चंपारण में गंडक की तेज धारा लगातार नदी किनारे की जमीन को काट रही है। कई जगहों पर घरों के नदी में समा जाने की खबरें सामने आई हैं और तटवर्ती गांवों के लोगों के सामने अपने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार नदी का बहाव लगातार किनारों को कमजोर कर रहा है, जिससे आने वाले समय में स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है।
खगड़िया में भी बूढ़ी गंडक का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है और आधिकारिक निगरानी में इसे बढ़ते हुए दर्ज किया गया है। वहीं बक्सर में गंगा और करमनासा दोनों नदियों का जलस्तर भी खतरे के स्तर को पार कर चुका है। 3 सितंबर की सुबह बक्सर के निगरानी केंद्र पर गंगा का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर और बढ़ता हुआ दर्ज किया गया, जबकि चौसा में करमनासा भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही थी।
सोन नदी ने भी चिंता बढ़ा दी है। पटना के मनेर में सोन का जलस्तर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज किया गया है और इसमें बढ़ोतरी जारी थी। लगातार बारिश के कारण नदियों में पानी बढ़ने से निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ रहा है। प्रशासन संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए है और संभावित स्थिति से निपटने के लिए तैयारियां तेज की जा रही हैं।
रोहतास में भी लगातार बारिश ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। सोन नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। कई जगहों पर पानी जमा होने से आवागमन प्रभावित हुआ है और स्थानीय प्रशासन हालात पर नजर रख रहा है। अगर बारिश का सिलसिला जारी रहता है तो नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है, जिससे संवेदनशील क्षेत्रों में मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
भोजपुर में गंगा के कटाव ने भी ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। नदी के तेज बहाव और कटाव के कारण कई घरों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। नदी किनारे रहने वाले परिवारों के लिए सबसे बड़ा खतरा यह है कि लगातार कटाव के कारण जमीन का बड़ा हिस्सा नदी में समा सकता है। ऐसे में प्रभावित परिवारों के सामने सुरक्षित स्थान पर जाने के साथ-साथ अपनी संपत्ति और रोजी-रोटी बचाने की चुनौती भी खड़ी हो जाती है।
बिहार की मौजूदा स्थिति का एक बड़ा कारण नेपाल और बिहार के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश भी है। नेपाल से निकलने वाली कई नदियां उत्तर बिहार में प्रवेश करती हैं और वहां भारी बारिश होने पर इन नदियों में पानी तेजी से बढ़ता है। हाल के दिनों में नेपाल में हुई भारी बारिश और बाढ़ के बाद बिहार की कई नदियों में पानी बढ़ने से पहले ही बाढ़ की आशंका बढ़ गई थी।
हालात को देखते हुए प्रशासन ने बाढ़ संभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और नदी के किनारे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। राहत और बचाव से जुड़ी एजेंसियों को भी संभावित आपात स्थिति के लिए तैयार रखा जा रहा है। प्रमुख नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
बिहार में बाढ़ का खतरा इसलिए भी गंभीर है क्योंकि राज्य की बड़ी आबादी नदियों के किनारे और निचले इलाकों में रहती है। जलस्तर बढ़ने के साथ खेतों में पानी भरने, फसलों को नुकसान पहुंचने, सड़कों के डूबने और गांवों का संपर्क टूटने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा नदी का कटाव लोगों के सामने स्थायी विस्थापन का संकट भी पैदा करता है।
फिलहाल सबसे ज्यादा नजर गंडक, गंगा, करमनासा, बूढ़ी गंडक और सोन समेत उन सभी नदियों पर है जो खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं। अगर आने वाले घंटों में बारिश और नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी होती है तो बिहार के कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन की चुनौती अब सिर्फ बढ़ते पानी की निगरानी करना नहीं, बल्कि तटबंधों, गांवों और निचले इलाकों को सुरक्षित रखना भी है।
बिहार में इस समय हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। एक तरफ नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं, दूसरी तरफ गंडक और गंगा का कटाव घरों और जमीन को निगल रहा है। ऐसे में आने वाले 24 से 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। प्रशासन की नजर नदी के हर बढ़ते सेंटीमीटर पर है, जबकि तटवर्ती इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की नजर इस बात पर टिकी है कि पानी कब नीचे जाएगा और उन्हें राहत कब मिलेगी।



