
अमेरिका में इतिहास रचने की ओर अब्दुल अल-सayed! मिशिगन से सीनेट चुनाव जीते
अमेरिका के मिशिगन राज्य में हुए सीनेट चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराकर जीत हासिल की है। इस जीत के साथ वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम अमेरिकी बन गए हैं। उनकी जीत को अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम माना जा रहा है। एसोसिएटेड प्रेस ने भी उनकी जीत की पुष्टि की है।
जीत के बाद अपने संबोधन में अल-सैयद ने अमेरिकी सरकार की नीतियों और राजनीतिक व्यवस्था में कॉरपोरेट कंपनियों तथा अरबपतियों के प्रभाव पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की ताकत अपनी कमियों को नजरअंदाज करने में नहीं, बल्कि उन्हें सुधारने की इच्छाशक्ति दिखाने में है। उनके मुताबिक, व्यवस्था को कुछ बड़े आर्थिक हितों ने अपने पक्ष में कर लिया है और इसे चुनौती देने की जरूरत है।
अपने भाषण में उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के टैक्स से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल पर भी जोरदार टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोगों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनका टैक्स उनके और उनके बच्चों के हित में खर्च हो रहा है, न कि दूसरे देशों के बच्चों पर बम गिराने के लिए। उनका यह बयान अमेरिका की विदेश नीति और विदेशी युद्धों पर खर्च को लेकर उनके लंबे समय से चले आ रहे विरोध को दर्शाता है।
अल-सैयद ने आम अमेरिकी परिवारों की आर्थिक परेशानियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दुनिया के सबसे अमीर और ताकतवर देशों में शामिल अमेरिका में लोगों के लिए किराने का सामान खरीदना, गाड़ी में पेट्रोल भरवाना, घर खरीदना और डॉक्टर को दिखाना इतना मुश्किल नहीं होना चाहिए। उनके चुनाव अभियान में महंगाई और आम लोगों की जेब पर पड़ रहे दबाव को प्रमुख मुद्दा बनाया गया था।
42 वर्षीय अब्दुल अल-सैयद पेशे से डॉक्टर और सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। वह वेन काउंटी के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख रह चुके हैं और इससे पहले डेट्रॉयट में भी सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। मिस्र-अमेरिकी मूल के अल-सैयद ने इससे पहले 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव भी लड़ा था, हालांकि उस समय उन्हें जीत नहीं मिली थी।
सीनेट चुनाव से पहले उनका मुकाबला रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स से था। चुनाव प्रचार के दौरान अल-सैयद ने स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता और सुलभ बनाने, अरबपतियों पर टैक्स लगाने, राजनीति में कॉरपोरेट फंडिंग का प्रभाव कम करने और विदेशी युद्धों पर अमेरिकी खर्च रोकने जैसे मुद्दे उठाए। उन्होंने मेडिकेयर फॉर ऑल यानी सभी नागरिकों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था का भी समर्थन किया।
चुनावी अभियान के दौरान अल-सैयद को अपनी ही पार्टी के भीतर विरोध का सामना करना पड़ा। डेमोक्रेटिक प्राइमरी में उनसे हारने वाली हेली स्टीवंस ने चुनाव के आखिरी दिनों में रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स का समर्थन कर दिया था। इसके बावजूद अल-सैयद ने रोजर्स को हराया। चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी उन पर निशाना साधा था और उनके खिलाफ इस्लामोफोबिक टिप्पणियां की थीं।
अल-सैयद की जीत ऐसे समय में हुई है, जब अमेरिका में विदेश नीति, ईरान युद्ध, महंगाई और राजनीतिक फंडिंग जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में रहे। उन्होंने अपने भाषण में विदेशी युद्धों पर खर्च के बजाय अमेरिकी परिवारों की जरूरतों को प्राथमिकता देने की बात कही। उनकी जीत के बाद अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि सीनेट में पहुंचने के बाद वह अपने चुनावी वादों और नीतिगत प्राथमिकताओं को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।


