
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक माहौल तेजी से गर्माता जा रहा है और इसी बीच Suvendu Adhikari ने महिलाओं की सुरक्षा को बड़ा चुनावी मुद्दा बताते हुए सत्तारूढ़ Mamata Banerjee सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खास कार्यक्रम “Walk The Talk” में बातचीत के दौरान उन्होंने दावा किया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति कमजोर हुई है और महिलाओं के खिलाफ अपराध एक बड़ी चिंता बनकर उभरे हैं।
सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि बंगाल में महिलाओं की सुरक्षा केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि सामाजिक चुनौती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रही है और कई मामलों में कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती। अधिकारी ने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्राथमिकता होगी और इसके लिए सख्त कानून तथा बेहतर पुलिसिंग लागू की जाएगी।
उन्होंने अपने इंटरव्यू में यह भी दावा किया कि भाजपा जिन कल्याणकारी योजनाओं की बात कर रही है, वे पहले से ही अन्य भाजपा-शासित राज्यों में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी हैं। उनके अनुसार, बंगाल में इन योजनाओं को और बेहतर तरीके से लागू किया जाएगा, जिससे महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा दोनों मिल सकेगी।
दरअसल, 2026 के चुनाव में महिला मतदाता एक निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं। पिछले चुनावों में महिलाओं का झुकाव तृणमूल कांग्रेस की ओर रहा है, लेकिन इस बार भाजपा इस वोट बैंक को साधने के लिए सुरक्षा और कल्याण जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा बंगाल चुनाव में प्रमुख बहस का केंद्र बन चुका है। एक ओर भाजपा इसे कानून-व्यवस्था की विफलता के रूप में पेश कर रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस अपने शासन के दौरान महिलाओं के लिए किए गए कामों को गिनाकर जवाब दे रही है।
कुल मिलाकर, सुवेंदु अधिकारी का यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले चुनाव में महिला सुरक्षा, रोजगार और कल्याण योजनाएं सबसे अहम मुद्दों में शामिल रहने वाले हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इन मुद्दों को किस नजर से देखते हैं और चुनावी नतीजों पर इसका कितना असर पड़ता है।



