
तमिलनाडु की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव के बाद बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK (तमिलगा वेत्री कड़गम) के उभार ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिला दिया है। अब सरकार गठन को लेकर जोड़-तोड़ के बीच विपक्षी दल AIADMK के भीतर ही भारी बगावत के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, AIADMK के बड़ी संख्या में विधायक TVK को समर्थन देने के पक्ष में खड़े हो गए हैं। खबर है कि पार्टी के लगभग दो-तिहाई विधायक एक बैठक में शामिल हुए, जहां उन्होंने नेतृत्व से विजय की पार्टी को समर्थन देने की मांग की।
बताया जा रहा है कि करीब 35 विधायकों ने खुलकर यह संकेत दिया है कि अगर पार्टी नेतृत्व ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो वे अलग रास्ता अपना सकते हैं। इससे AIADMK में टूट का खतरा और बढ़ गया है।
दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उसे सरकार बनाने के लिए बहुमत से कुछ सीटें कम हैं। ऐसे में उसे सहयोगी दलों की जरूरत है।
इसी वजह से AIADMK के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि क्या सत्ता में भागीदारी के लिए TVK को समर्थन दिया जाए या विपक्ष में बैठा जाए।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में राष्ट्रीय स्तर की राजनीति भी अहम भूमिका निभा रही है। बताया जा रहा है कि कुछ ताकतें नहीं चाहतीं कि कांग्रेस समर्थित गठबंधन सरकार बने, इसलिए AIADMK पर TVK को समर्थन देने का दबाव बढ़ रहा है।
इसी बीच, AIADMK नेतृत्व लगातार यह कह रहा है कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान ही लेगा और अभी किसी तरह की आधिकारिक टूट की स्थिति नहीं है। हालांकि जमीनी स्तर पर विधायकों की नाराजगी और दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अगर AIADMK के विधायक अलग होकर TVK का समर्थन करते हैं, तो तमिलनाडु में एक नई सरकार का गठन हो सकता है और यह राज्य की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा।
वहीं दूसरी तरफ, यह स्थिति AIADMK के लिए सबसे बड़े संकट के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि जयललिता के निधन के बाद पार्टी पहले ही कई बार अंदरूनी संघर्ष से गुजर चुकी है। अब एक और संभावित विभाजन उसकी ताकत को और कमजोर कर सकता है।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु में सत्ता की लड़ाई अब सिर्फ पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि पार्टियों के अंदर भी लड़ी जा रही है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि AIADMK एकजुट रहती है या फिर राज्य को एक नया राजनीतिक समीकरण देखने को मिलता है।


