
पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच भारत सरकार ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी देशों और ईरान में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और उनका कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित इलाकों में मौजूद भारतीयों को हर संभव सहायता दी जा रही है।
सरकारी जानकारी के अनुसार ईरान में इस समय लगभग 9,000 भारतीय छात्र मौजूद हैं। बढ़ते तनाव को देखते हुए कई छात्रों को असुरक्षित क्षेत्रों से सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है। विदेश मंत्रालय ने इसके साथ ही एक विशेष कंट्रोल रूम भी स्थापित किया है, जो 24 घंटे काम कर रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में मौजूद भारतीय दूतावासों तथा वाणिज्य दूतावासों के साथ लगातार समन्वय कर रहा है। इस कंट्रोल रूम के जरिए भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की सहायता की जा रही है।
युद्ध के बीच भारतीय नागरिकों को नुकसान भी हुआ है। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस संघर्ष के दौरान अब तक दो भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि एक भारतीय लापता बताया जा रहा है। ये लोग उन व्यापारी जहाजों पर सवार थे जिन्हें समुद्र में निशाना बनाया गया। इसके अलावा कुछ अन्य भारतीय भी घायल हुए हैं, जिनका इलाज कराया जा रहा है और सरकार उनके परिवारों के संपर्क में है।
सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर भी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और इजरायल सहित कई देशों के नेताओं से बातचीत कर क्षेत्र की स्थिति पर चर्चा की है। वहीं विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी क्षेत्रीय देशों के अपने समकक्षों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और हालात को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने की कोशिश की जा सके।
भारत सरकार का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और यह इलाका भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसी कारण सरकार वहां के हालात पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर निकासी या अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए जा सकते हैं। हाल के दिनों में भारत ने बड़ी संख्या में नागरिकों को सुरक्षित वापस भी लाया है, जिससे यह साफ होता है कि सरकार इस संकट को गंभीरता से ले रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में युद्ध लंबे समय तक जारी रहता है तो वहां काम कर रहे लाखों भारतीयों और छात्रों के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में भारत की प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा, सुरक्षित निकासी और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए क्षेत्र में तनाव कम कराने की होगी। फिलहाल सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने के संकेत दिए हैं।



