
उत्तर प्रदेश में महंगाई और आपूर्ति की चिंता के बीच अब रसोई गैस के बाद खाने के तेल को लेकर भी संकट की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। कई जिलों में रिफाइंड और सरसों के तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है, जिससे आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ने लगा है। बाजारों में तेल की कीमत बढ़ने और आपूर्ति को लेकर फैल रही चर्चाओं के कारण कई जगह उपभोक्ता जरूरत से ज्यादा खरीदारी करने लगे हैं। इससे कुछ दुकानों पर तेल की उपलब्धता कम होने लगी है और लोगों में चिंता का माहौल बन गया है।
रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में रिफाइंड और अन्य वनस्पति तेलों की कीमतों में लगभग 10 से 20 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी देखी गई है, जबकि सरसों के तेल की कीमत भी करीब 8 से 10 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ी है। व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में दाम बढ़ने और आपूर्ति से जुड़ी आशंकाओं के कारण स्थानीय बाजार पर भी असर पड़ रहा है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और वैश्विक व्यापार मार्गों में बढ़ती अनिश्चितता का असर खाद्य तेल के बाजार पर भी पड़ रहा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े खाद्य तेल आयातक देशों में शामिल है और बड़ी मात्रा में सोयाबीन, सूरजमुखी और पाम ऑयल विदेशों से मंगाता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों और शिपिंग लागत बढ़ने का सीधा असर घरेलू बाजार पर दिखाई देता है। हाल ही में बढ़ते वैश्विक दामों और माल ढुलाई की लागत के कारण भारतीय खरीदार भी जल्द आपूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में दुकानदारों का कहना है कि उपभोक्ता भविष्य में कीमतें और बढ़ने की आशंका से ज्यादा मात्रा में तेल खरीदने लगे हैं। कुछ लोग पुराने स्टॉक या कम कीमत वाले पैकेट खोज रहे हैं ताकि बढ़ती कीमतों से बचा जा सके। इससे दुकानों पर अचानक मांग बढ़ गई है और कुछ जगहों पर स्टॉक जल्दी खत्म होने की स्थिति बन रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो वैश्विक खाद्य तेल बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इससे भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों में खाने के तेल की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है और घरेलू महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी करें, ताकि बाजार में अनावश्यक संकट की स्थिति न बने।
इस तरह यूपी में पहले रसोई गैस की लंबी कतारों और आपूर्ति की समस्या के बाद अब खाने के तेल की कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है, जिससे आम परिवारों के लिए रोजमर्रा का खर्च और अधिक चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।



