Advertisement
दिल्ली (यूटी)लाइव अपडेट
Trending

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा

Advertisement
Advertisement

लोकसभा में पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक टकराव के बीच लोकसभा अध्यक्ष Om Birla के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव अंततः ध्वनिमत से खारिज हो गया। इसके बाद जब स्पीकर ओम बिरला दोबारा सदन की कार्यवाही संभालने के लिए लौटे तो उन्होंने सभी सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि संसद देश के 140 करोड़ लोगों की सामूहिक इच्छा का प्रतिनिधित्व करती है और यहां हर सदस्य को नियमों के तहत अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सदन की कार्यवाही पूरी तरह संसदीय नियमों और परंपराओं के अनुसार चलती है और स्पीकर का दायित्व सभी दलों के साथ निष्पक्ष व्यवहार करना है।

दरअसल, विपक्षी दलों ने स्पीकर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। इस प्रस्ताव पर लोकसभा में लगभग 10 से 12 घंटे तक लंबी बहस चली, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। अंत में सदन में ध्वनिमत के जरिए मतदान कराया गया और प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया। प्रस्ताव गिरने के बाद सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित भी करनी पड़ी क्योंकि विपक्षी सदस्य नारेबाजी करते रहे।

सदन में वापसी के बाद ओम बिरला ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक सांसद को बोलने और अपनी बात रखने का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि कई ऐसे सदस्य भी होते हैं जो शुरुआत में बोलने से हिचकिचाते हैं, लेकिन उन्हें भी उन्होंने प्रोत्साहित किया है ताकि लोकतांत्रिक चर्चा मजबूत हो सके। बिरला ने यह भी कहा कि स्पीकर के पास किसी सांसद का माइक्रोफोन बंद करने के लिए कोई “स्विच” नहीं होता और सदन की कार्यवाही तय नियमों के अनुसार ही चलती है।

इस पूरे विवाद के दौरान केंद्र सरकार ने भी स्पीकर के समर्थन में खुलकर पक्ष रखा। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने लोकसभा में कहा कि स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना संसदीय इतिहास में बेहद दुर्लभ और दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संसदीय परंपरा में स्पीकर को निष्पक्ष संस्था के रूप में देखा जाता है और उस पर इस तरह सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक संकेत नहीं है। शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह संसद की गरिमा को राजनीतिक विवाद में बदलने की कोशिश कर रहा है।

विपक्षी दलों का कहना था कि सदन की कार्यवाही के दौरान विपक्षी नेताओं को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा सीमित कर दी जाती है। इसी कारण उन्होंने स्पीकर के खिलाफ यह प्रस्ताव लाने का फैसला किया। हालांकि संख्या बल के कारण यह प्रस्ताव पास नहीं हो सका और सरकार समर्थक सांसदों के समर्थन से इसे आसानी से खारिज कर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह घटनाक्रम संसद में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण का संकेत भी है। एक ओर सत्ता पक्ष स्पीकर की निष्पक्षता का बचाव कर रहा है, वहीं विपक्ष संसदीय प्रक्रियाओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। ऐसे माहौल में बजट सत्र के दौरान संसद की कार्यवाही और भी अधिक विवादों और तीखी बहसों के बीच आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद ओम बिरला का सदन में लौटकर दिया गया बयान संसद में संतुलन और मर्यादा बनाए रखने का संदेश माना जा रहा है। उन्होंने सभी दलों से अपील की कि वे संसद की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखते हुए रचनात्मक बहस में भाग लें।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
YouTube
LinkedIn
Share