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असम दौरे पर पीएम मोदी ने किया 24 हजार करोड़ के शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमिपूजन

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने असम दौरे के दौरान राज्य को बड़ी विकास परियोजनाओं की सौगात दी। सिलचर में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने लगभग 24 हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर का भूमिपूजन किया। यह कॉरिडोर उत्तर-पूर्व भारत की कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कांग्रेस पर तीखा हमला भी बोला और कहा कि जहां कांग्रेस के “दिमाग का ताला बंद हो जाता है, वहां से उनका काम शुरू होता है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह हाई-स्पीड कॉरिडोर सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि पूरे नॉर्थ-ईस्ट के विकास का नया अध्याय है। करीब 166 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर मेघालय और असम को बेहतर तरीके से जोड़ेगा और इसके जरिए सिलचर, मिजोरम, मणिपुर और त्रिपुरा जैसे राज्यों की कनेक्टिविटी में भी बड़ा सुधार होगा। इससे व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अपने भाषण में पीएम मोदी ने कहा कि बराक घाटी को फिर से व्यापार और कारोबार का बड़ा केंद्र बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने सिलचर को इस क्षेत्र का “गेटवे” बताते हुए कहा कि यहां की सांस्कृतिक विविधता और उद्यमशीलता इसे खास बनाती है। सरकार का लक्ष्य है कि बेहतर सड़क और परिवहन सुविधाओं के जरिए उत्तर-पूर्व को देश के अन्य हिस्सों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से अधिक मजबूत तरीके से जोड़ा जाए।

राजनीतिक मोर्चे पर भी प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक उत्तर-पूर्व के विकास को नजरअंदाज किया और अब भाजपा की “डबल इंजन सरकार” इस क्षेत्र को नई गति दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राजनीतिक ताकतें भारत के विकास में बाधा डालने की कोशिश करती हैं, लेकिन केंद्र सरकार देश के विकास को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रही है।

असम में प्रधानमंत्री के दौरे के दौरान कई अन्य विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं में सड़क, परिवहन और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई बड़े कार्यक्रम शामिल हैं, जिनकी कुल लागत 24 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं से नॉर्थ-ईस्ट में आर्थिक विकास, रोजगार और व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार शिलांग-सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर बनने के बाद यात्रा का समय काफी कम होगा और लॉजिस्टिक्स लागत भी घटेगी। इससे उत्तर-पूर्व भारत के राज्यों को बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से जोड़ने में भी मदद मिलेगी, जो क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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