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बंगाल में दो चरणों में मतदान, 9 अप्रैल से शुरू होगी वोटिंग

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देश में एक बार फिर चुनावी माहौल बन गया है। भारत के चुनाव आयोग ने 2026 में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले चुनावों का पूरा कार्यक्रम जारी किया है। आयोग के अनुसार इन राज्यों में मतदान 9 अप्रैल से शुरू होकर 29 अप्रैल तक अलग-अलग चरणों में कराया जाएगा, जबकि सभी राज्यों के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस घोषणा के साथ ही संबंधित राज्यों में आदर्श आचार संहिता भी तुरंत लागू हो गई है।

चुनाव आयोग के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में कराया जाएगा। इन राज्यों में मतदाता एक ही दिन में अपने प्रतिनिधि चुनेंगे। वहीं तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव 23 अप्रैल 2026 को एक चरण में होंगे। दूसरी ओर पश्चिम बंगाल में सुरक्षा और प्रशासनिक कारणों को देखते हुए मतदान दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को कराया जाएगा। इन सभी राज्यों में वोटों की गिनती एक साथ 4 मई 2026 को की जाएगी और उसी दिन नई सरकारों की तस्वीर साफ हो जाएगी।

चुनाव आयोग के मुताबिक इन पांचों राज्यों में मिलाकर करीब 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। मतदान के लिए लगभग 2.19 लाख पोलिंग स्टेशन बनाए जाएंगे और करीब 25 लाख चुनाव कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि चुनाव शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से आचार संहिता का पालन करने और चुनाव प्रक्रिया में सहयोग करने की अपील भी की है।

राजनीतिक दृष्टि से ये चुनाव बेहद अहम माने जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार सत्ता में है और भाजपा वहां मुख्य चुनौती के रूप में उभर रही है। वहीं तमिलनाडु में डीएमके सरकार, केरल में एलडीएफ और असम में भाजपा की सरकार है। पुडुचेरी में भी सत्ता को लेकर कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। इसलिए इन चुनावों को न सिर्फ इन राज्यों बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। अब अगले कुछ हफ्तों तक इन राज्यों में चुनावी रैलियों, प्रचार अभियानों और राजनीतिक बयानबाजी का दौर तेज रहने की संभावना है। मतदाताओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि आने वाले चुनावों में जनता किस पार्टी को सत्ता की जिम्मेदारी सौंपती है।

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