
Rahul Gandhi ने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। तमिलनाडु में दिए गए अपने बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिलाओं के अधिकारों के नाम पर असल में देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने साफ कहा कि यह विधेयक वास्तव में महिला सशक्तिकरण से जुड़ा नहीं है, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक मंशा छिपी हुई है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कहा कि महिला आरक्षण का मूल कानून पहले ही पारित हो चुका है, लेकिन वर्तमान प्रस्ताव को परिसीमन से जोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे इसका उद्देश्य बदल जाता है। उनका दावा है कि सरकार इस प्रक्रिया के जरिए लोकसभा और विधानसभा सीटों के पुनर्गठन की योजना बना रही है, जिससे कुछ राज्यों और वर्गों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस कदम से ओबीसी, एससी-एसटी और दक्षिण भारत के राज्यों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने कहा कि परिसीमन के जरिए महिलाओं को सशक्त नहीं किया जा सकता और सरकार महिलाओं के मुद्दे को एक “कवर” के तौर पर इस्तेमाल कर रही है।
यह मुद्दा संसद से लेकर सड़कों तक गरमाया हुआ है। विपक्षी दलों का कहना है कि वे महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसे परिसीमन से जोड़ने का विरोध कर रहे हैं। हाल ही में संसद में पेश किया गया संविधान संशोधन बिल भी इसी विवाद के चलते पास नहीं हो सका, क्योंकि विपक्ष ने इसे चुनावी सीमाओं को बदलने की कोशिश बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे विवाद के पीछे “उत्तर बनाम दक्षिण” की बहस भी जुड़ गई है। दक्षिणी राज्यों को डर है कि परिसीमन के बाद उनकी सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारत के राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। इसी कारण यह मुद्दा अब सिर्फ महिला आरक्षण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संघीय ढांचे और राजनीतिक संतुलन का बड़ा प्रश्न बन गया है।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि विपक्ष किसी भी कीमत पर देश के संघीय ढांचे और राज्यों के अधिकारों को कमजोर नहीं होने देगा। उन्होंने दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों को भरोसा दिलाया कि उनका प्रतिनिधित्व सुरक्षित रखा जाएगा और इस तरह के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध किया जाएगा।
कुल मिलाकर, महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर देश की राजनीति में नया टकराव देखने को मिल रहा है। एक ओर सरकार इसे महिलाओं के अधिकारों से जुड़ा ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक रणनीति करार दे रहा है। आने वाले समय में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है और इसका असर आने वाले चुनावों पर भी देखने को मिल सकता है।



