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आंध्र प्रदेश में जहरीला दूध बना मौत का कारण

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आंध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कथित रूप से मिलावटी या जहरीला दूध पीने से कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य लोग अस्पताल में भर्ती हैं। यह मामला राजमहेंद्रवरम (राजमुंदरी) के आसपास के इलाकों में सामने आया, जहां अचानक कई लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं दिखने लगीं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार पीड़ितों में उल्टी, पेट दर्द, पेशाब बंद होना और किडनी फेल होने जैसे गंभीर लक्षण पाए गए, जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया।

बताया जा रहा है कि यह मामला फरवरी के अंत में सामने आया जब कई बुजुर्ग और स्थानीय निवासी अचानक बीमार पड़ने लगे। जांच में पता चला कि प्रभावित लोग एक ही सप्लायर से दूध ले रहे थे। शुरुआती जांच में आशंका जताई गई कि दूध में खतरनाक रसायन मिल गया था, जिससे लोगों के शरीर पर जहरीला असर पड़ा और कई मरीजों की किडनी ने काम करना बंद कर दिया। कुछ मरीजों की हालत इतनी गंभीर हो गई कि उन्हें डायलिसिस तक की जरूरत पड़ी।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह दूध एक स्थानीय डेयरी से लगभग 100 से ज्यादा परिवारों को सप्लाई किया गया था। अधिकारियों ने उस डेयरी यूनिट को सील कर दिया है और संबंधित दूध सप्लायर को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञ अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दूध में जहरीला पदार्थ कैसे मिला। प्रारंभिक रिपोर्ट में संकेत मिले हैं कि दूध के स्टोरेज सिस्टम में तकनीकी खराबी के कारण एक रासायनिक पदार्थ दूध में मिल गया हो सकता है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक साबित हुआ।

इस घटना के बाद राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट हो गए हैं। प्रभावित इलाकों में मेडिकल कैंप लगाए गए हैं और उन सभी परिवारों की जांच की जा रही है जिन्होंने उस डेयरी से दूध लिया था। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मरीजों का इलाज कर रही है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को फिलहाल संदिग्ध दूध या अनजान स्रोत से डेयरी उत्पाद लेने से बचना चाहिए।

यह हादसा खाद्य सुरक्षा और दूध में मिलावट की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। भारत में दूध को रोजमर्रा का सबसे जरूरी खाद्य पदार्थ माना जाता है, ऐसे में इस तरह की घटना लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि दूध की सप्लाई चेन और डेयरी यूनिट्स की नियमित जांच बेहद जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदी को रोका जा सके।

फिलहाल प्रशासन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि आखिर दूध में जहरीला तत्व कैसे मिला और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। वहीं पीड़ित परिवारों के लिए यह घटना गहरे सदमे और दुख का कारण बन गई है।

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