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“क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?”

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अमेरिका में एक अत्यंत विवादित और वायरल moment के बीच भारतीय मूल की डॉक्टर डॉ. निशा वर्मा ने ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भारी चर्चा बटोरी है, जब एक अमेरिकी सीनेटर ने उनसे पूछा कि “क्या पुरुष गर्भवती हो सकते हैं?” और उन्होंने इस सवाल पर सीधा हां या ना में जवाब नहीं दिया, जिससे इंटरनेट पर बहस का तांता लग गया। यह घटनाक्रम अमेरिकी सीनेट की हेल्थ, एजुकेशन, लेबर एंड पेंशन (HELP) समिति की एक सुनवाई के दौरान हुआ, जिसका विषय “महिलाओं की सुरक्षा और केमिकल गर्भपात दवाओं के खतरों” पर था।

डॉ. निशा वर्मा, जो एक डबल बोर्ड-सर्टिफाइड ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट (OB/GYN) और रिप्रोडक्टिव हेल्थ पॉलिसी एडवाइज़र हैं, ने सवाल के जवाब में कहा कि उन्होंने सीधे शब्दों में उत्तर देने से इसलिये परहेज़ किया क्योंकि वह “निश्चित नहीं थीं कि सवाल का असली मकसद क्या है” और यह कि चिकित्सा विज्ञान तथा साक्ष्य को बनाये रखना चाहिए, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वह ऐसे मरीजों का इलाज करती हैं जिनकी पहचान विभिन्न लिंगों के रूप में होती है।

सीनेटर जोश हॉली ने उन्हें स्पष्ट उत्तर देने के लिये कई बार कहा और कहा कि यह एक जैविक वास्तविकता को स्थापित करने जैसा सवाल है, न कि राजनीतिक बहस। उन्होंने रिकॉर्ड पूर्वक यह भी कहा कि “गर्भवती महिलाएं होती हैं, पुरुष नहीं,” और यदि डॉ. वर्मा इस बुनियादी वैज्ञानिक तथ्य को स्वीकार नहीं करतीं तो उनके वैज्ञानिक दावों पर प्रश्न उठता है।

इस मुलाक़ात का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें यह तनावपूर्ण पल कैद है और दर्शकों के बीच मिलेजुले प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग डॉ. वर्मा के जवाब को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अस्पष्ट मान रहे हैं तो कुछ लोग यह सवाल उठाते हैं कि क्या सवाल खुद प्रासंगिक था। कई उपयोगकर्ताओं ने इसे “बहुत ही हास्यास्पद” बताया, और इस पर अरबपति एलोन मस्क ने भी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने कहा कि “यह प्रश्न पूछे जाने योग्य है ही नहीं।”

डॉ. निशा वर्मा अटलांटा आधारित एक विशेषज्ञ डॉक्टर हैं, जिन्होंने अपनी चिकित्सा शिक्षा संयुक्त राज्य के प्रतिष्ठित संस्थानों से प्राप्त की है और वे रिप्रोडक्टिव हेल्थ पॉलिसी एवं एडवोकेसी में वरिष्ठ सलाहकार की भूमिका भी निभाती हैं। अपने पेशेवर अनुभव के दौरान उन्होंने गर्भ निरोधक उपायों, गर्भपात दवाओं और जटिल परिवार नियोजन मामलों पर व्यापक कार्य किया है।

विशेष रूप से यह मामला उस बड़ी बहस का हिस्सा बन गया है जो संयुक्त राज्य में लैंगिक पहचान, जैविक यथार्थ और चिकित्सा विज्ञान के बीच के अंतर को लेकर चल रही है। सोशल मीडिया पर लोग इस घटना को लेकर अपनी-अपनी राय रखते हुए सैद्धांतिक, वैज्ञानिक और राजनीतिक दलीलों को जोड़कर चर्चा कर रहे हैं, जिससे यह विषय और अधिक व्यापक रूप से वायरल हो गया है।

इस पूरी घटना से यह स्पष्ट होता है कि कैसे एक छोटी-सी सुनवाई में पूछे गये एक सवाल का जवाब, जब वह सार्वजनिक रूप से साझा होता है, तो वह वैज्ञानिक, सामाजिक और राजनीतिक विमर्शों को एकसाथ जोड़ देता है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी चर्चा का विषय बन जाता है — चाहे वह चिकित्सा विज्ञान हो, लैंगिक पहचान की बहस हो या नीति-निर्माण का सवाल।

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