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एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी से दहला यूपी

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उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यहां एक युवक ने कथित तौर पर एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी से परेशान होकर अपनी मां और चाचा के साथ आत्महत्या कर ली। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें युवक ने चार लोगों को अपनी मौत का जिम्मेदार बताया है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया और पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।

यह मामला फतेहपुर के सदर कोतवाली क्षेत्र के लखनऊ बाईपास रोड स्थित चौफेरवा इलाके का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक घर के अंदर मां और बेटे के शव खून से लथपथ हालत में मिले, जबकि कुछ दूरी पर उनका चाचा गंभीर रूप से घायल पड़ा था। पड़ोसियों और परिजनों की मदद से उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और घटनास्थल से सल्फास की गोली तथा ब्लेड बरामद किए हैं।

पुलिस जांच में पता चला कि मृतक युवक का नाम अमर श्रीवास्तव था, जो अपनी मां सुशीला श्रीवास्तव और चाचा सुनील श्रीवास्तव के साथ घर में रहता था। परिवार कई साल पहले शहर के दूसरे इलाके से यहां आकर बस गया था और किराना तथा सामान सप्लाई का काम करता था। घटना वाले दिन जब परिवार का एक सदस्य घर लौटा तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। काफी देर तक आवाज देने के बाद भी जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो पड़ोसी की छत के सहारे घर के अंदर पहुंचा गया, जहां यह भयावह दृश्य देखकर सभी लोग स्तब्ध रह गए।

पुलिस को कमरे से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें युवक ने लिखा कि कुछ लोग उसे एससी-एसटी एक्ट में झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रहे थे और इसी दबाव के कारण उसने यह कठोर कदम उठाया। नोट में चार लोगों के नाम भी लिखे बताए जा रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में एक अधिवक्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है और अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

घटना के बाद इलाके में भारी भीड़ जुट गई और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिला। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के सही कारण और घटनाक्रम की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी। साथ ही सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों की भी गहराई से जांच की जा रही है ताकि दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि समाज में बढ़ते तनाव, कानूनी डर और सामाजिक दबावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया बेहद जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने की कोशिश कर रही है और पूरे इलाके में शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।

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