
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला है। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में चल रही विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान हजारों-लाखों लोगों के नाम मनमाने तरीके से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी मतदाता सूची के आधार पर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने थे, तो अब उसी सूची से मतदाताओं को वोट देने से क्यों रोका जा रहा है।
कोलकाता में आयोजित विरोध प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम भी सूची से हटा दिए गए हैं जो जीवित हैं और वर्षों से मतदान करते आ रहे हैं। विरोध के दौरान कुछ ऐसे मतदाताओं को मंच पर भी लाया गया जिनके नाम मतदाता सूची में “मृत” दिखाए गए थे, जबकि वे खुद कार्यक्रम में मौजूद थे।
दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया गया। इस प्रक्रिया में राज्यभर में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने का मामला सामने आया, जिसके बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कदम चुनावी गणित को प्रभावित करने के लिए उठाया गया है, जबकि दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि सूची से अवैध या गलत तरीके से जुड़े नाम हटाए गए हैं।
ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर “साजिश” का आरोप लगाया और कहा कि असली मतदाताओं को मतदान से वंचित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ऐलान किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर सड़कों से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेगी और हर उस मतदाता की आवाज उठाएगी जिसका नाम सूची से हटाया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव का सवाल चुनावी माहौल को और अधिक गरमा सकता है। फिलहाल इस पूरे विवाद ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।



