
जंग के साए में ‘शेनलोंग’ का साहसिक सफर
मध्य-पूर्व में चल रहे भीषण तनाव और समुद्री हमलों के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। युद्धग्रस्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हुए ‘Shenlong’ नाम का तेल टैंकर सफलतापूर्वक मुंबई पोर्ट पहुंच गया। यह जहाज सऊदी अरब से करीब 1.35 लाख मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत आया है और क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद इस मार्ग से सुरक्षित भारत पहुंचने वाला पहला बड़ा जहाज माना जा रहा है। जहाज के मुंबई पहुंचने को भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक यह सुएज़मैक्स श्रेणी का तेल टैंकर है जो लाइबेरिया के झंडे के तहत संचालित होता है। यह जहाज 1 मार्च को सऊदी अरब के रास तनुरा बंदरगाह से कच्चा तेल लोड कर भारत के लिए रवाना हुआ था। रास्ते में इसे दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, से गुजरना पड़ा। हाल के दिनों में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़े सैन्य संघर्ष के कारण यह मार्ग बेहद खतरनाक बन गया है, जहां कई जहाजों पर हमले और धमकियों की घटनाएं सामने आई हैं।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि जहाज ने खतरे से बचने के लिए एक खास रणनीति अपनाई। जहाज ने कुछ समय के लिए अपना AIS (Automatic Identification System) बंद कर दिया, जिससे उसकी लोकेशन समुद्री ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई नहीं दी। इस तकनीक को समुद्री भाषा में “गोइंग डार्क” कहा जाता है। इसका उद्देश्य दुश्मन की निगरानी, ड्रोन या मिसाइल हमलों से बचना था। जब जहाज सबसे जोखिम भरे इलाके को पार कर गया, तब दोबारा उसका सिग्नल ट्रैकिंग सिस्टम पर दिखाई दिया।
इस जहाज का नेतृत्व भारतीय कप्तान सुखशांत सिंह संधू कर रहे थे और जहाज पर कुल 29 सदस्यीय क्रू मौजूद था, जिसमें अलग-अलग देशों के नाविक शामिल थे। सभी ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यह यात्रा पूरी की। जहाज के मुंबई पोर्ट पहुंचने के बाद इसे जवाहर दीप टर्मिनल पर लगाया गया और यहां से तेल को रिफाइनरियों तक पहुंचाया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना केवल एक जहाज के सुरक्षित पहुंचने की कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत भी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा मध्य-पूर्व से आयात करता है और उसका बड़ा भाग इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो देश की ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी कारण इस जहाज की सुरक्षित यात्रा को भारत की रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बड़ी सफलता माना जा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बनी रहती है, तब तक इस समुद्री मार्ग पर खतरा बना रहेगा। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां पहले ही इस रास्ते से अपने जहाजों को रोक चुकी हैं। ऐसे में ‘शेनलोंग’ का यह साहसिक सफर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और भारत की कूटनीतिक रणनीति—तीनों के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत बनकर सामने आया है।



