
महाराष्ट्र की राजनीति में एक अहम और भावनात्मक मोड़ देखने को मिला है। बारामती से सांसद Supriya Sule ने साफ शब्दों में घोषणा की है कि वह भविष्य में अपने ही परिवार के किसी सदस्य के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पवार परिवार के भीतर राजनीतिक प्रतिस्पर्धा ने पिछले कुछ वर्षों में सुर्खियां बटोरी हैं।
सुप्रिया सुले ने कहा कि यदि कभी ऐसी स्थिति बनती है कि परिवार का कोई सदस्य बारामती या किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ता है, तो वह उस सीट से हटकर किसी दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ना पसंद करेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य राजनीति करना है, लेकिन परिवार के भीतर टकराव पैदा करना नहीं।
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में Supriya Sule का मुकाबला उनकी ही भाभी Sunetra Pawar से हुआ था। उस चुनाव में सुले ने जीत हासिल की थी, लेकिन इस “पवार बनाम पवार” मुकाबले ने परिवार और पार्टी दोनों में खींचतान को उजागर किया था।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पवार परिवार के भीतर एकता बनाए रखने और आंतरिक संघर्ष को खत्म करने की दिशा में उठाया गया है। लगातार परिवार के सदस्यों के बीच चुनावी टकराव से पार्टी की छवि और जनाधार पर असर पड़ रहा था, जिसे अब संतुलित करने की कोशिश की जा रही है।
सुले ने यह भी संकेत दिया कि राजनीति और परिवार को अलग-अलग रखना जरूरी है। उनका मानना है कि व्यक्तिगत रिश्तों को चुनावी प्रतिस्पर्धा से ऊपर रखना चाहिए, ताकि संगठन और समर्थकों के बीच गलत संदेश न जाए।
इस फैसले का असर आने वाले चुनावों, खासकर बारामती सीट पर, साफ तौर पर देखा जा सकता है। यह सीट लंबे समय से पवार परिवार का गढ़ रही है, और अब यहां “परिवार बनाम परिवार” की राजनीति से दूरी बनाने का संदेश दिया गया है।
कुल मिलाकर, Supriya Sule का यह बयान न केवल एक राजनीतिक रणनीति है, बल्कि परिवार और राजनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी माना जा रहा है।



