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तमिलनाडु चुनाव 2026: DMK बनाम AIADMK-BJP गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला

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तमिलनाडु में 2026 का विधानसभा चुनाव इस बार बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय मुकाबले के रूप में उभर रहा है। राज्य की राजनीति, जो लंबे समय तक DMK और AIADMK के बीच सिमटी रही, अब नए समीकरणों और गठबंधनों के कारण काफी जटिल हो गई है। एक तरफ मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में DMK सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर AIADMK ने बीजेपी के साथ गठबंधन कर मजबूत चुनौती पेश की है। इसके अलावा अभिनेता विजय की पार्टी TVK की एंट्री ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया है।

राज्य में कुल 234 सीटों पर 23 अप्रैल को मतदान होना है और 4 मई को नतीजे घोषित किए जाएंगे। DMK, जिसने 2021 में भारी बहुमत के साथ सत्ता हासिल की थी, इस बार अपने कामकाज और कल्याणकारी योजनाओं के आधार पर जनता के बीच जा रही है। वहीं AIADMK, जो पिछली हार के बाद वापसी की कोशिश कर रही है, बीजेपी, पीएमके और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी है।

इस चुनाव की सबसे बड़ी खासियत अभिनेता Vijay की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (TVK) का उभरना है, जिसने पारंपरिक दो-दलीय मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि TVK का असर खासकर युवाओं और शहरी वोटर्स पर पड़ सकता है, जिससे DMK और AIADMK दोनों के वोट शेयर में सेंध लग सकती है।

दूसरी ओर, बीजेपी तमिलनाडु में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए AIADMK के साथ मिलकर रणनीति बना रही है। हालांकि राज्य में बीजेपी की पकड़ अभी सीमित मानी जाती है, लेकिन गठबंधन के जरिए वह अपने जनाधार को बढ़ाने की कोशिश कर रही है। वहीं विपक्षी दलों का आरोप है कि AIADMK ने बीजेपी के सामने “समर्पण” कर दिया है, जिससे राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।

चुनावी मैदान में क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की भी झलक दिखाई दे रही है। बेरोजगारी, विकास, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दे प्रमुख बने हुए हैं। इसके अलावा कई सीटों पर कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है, जहां छोटे दल और नए उम्मीदवार भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

AIADMK के नेता ई.के. पलानीस्वामी ने दावा किया है कि उनका गठबंधन मजबूत है और वे सत्ता में वापसी करेंगे, जबकि DMK अपने प्रदर्शन और योजनाओं के दम पर दूसरी बार सरकार बनाने का भरोसा जता रही है।

कुल मिलाकर, तमिलनाडु का यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं है, बल्कि यह राज्य की राजनीति के नए युग की शुरुआत भी हो सकता है। पारंपरिक दलों के साथ नए खिलाड़ियों की एंट्री ने मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या DMK अपनी पकड़ बरकरार रख पाएगी या AIADMK-BJP गठबंधन वापसी करेगा, या फिर विजय की TVK कोई बड़ा उलटफेर कर देगी।

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