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ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने हासिल की हवा में पूर्ण श्रेष्ठता

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भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” पर स्विस थिंक टैंक की ताज़ा रिपोर्ट ने 2025 में भारत–पाकिस्तान के बीच हुए हवाई संघर्ष को फिर से केंद्र बिंदु पर ला दिया है। यह विस्तृत विश्लेषण बताता है कि भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) ने 7 से 10 मई 2025 के दौरान पाकिस्तान की वायु क्षमता के खिलाफ हवा में निर्णायक श्रेष्ठता (air superiority) हासिल की थी, जिससे अंततः पाकिस्तान को युद्धविराम (ceasefire) के लिए हाथ फैलाना पड़ा।

स्विस मिलिट्री थिंक टैंक “Center for Military History and Perspective Studies (CHPM)” की रिपोर्ट लगभग 47 पृष्ठों में विस्तृत विश्लेषण देती है कि कैसे भारतीय वायु सेना ने इस ऑपरेशन में रणनीतिक बढ़त बनाई। रिपोर्ट के अनुसार भारतीय वायुसेना के राफेल, मिराज-2000 जैसे आधुनिक युद्धक विमान पाकिस्तान के ठिकानों पर सटीक हवाई हमले कर रहे थे और पाकिस्तान की तरफ से जवाब में दागी गई मिसाइलें तथा ड्रोन हमलों को भारतीय एस-400, आकाशतीर नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग द्वारा बड़े पैमाने पर विफल किया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तान की वायु सेना (PAF) के प्रयास असफल रहे और उसके लगभग सभी प्रतिस्पर्धी प्रयासों को भारत ने प्रभावहीन बना दिया। पाकिस्तानी पक्ष द्वारा भेजे गए 900 से अधिक ड्रोन और लंबी दूरी की मिसाइलें भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने बेअसर साबित हुईं।

रिपोर्ट के निष्कर्षों के मुताबिक भारत ने न सिर्फ आतंकी ठिकानों को नष्ट किया बल्कि पाकिस्तान की वायु क्षमता को भी कमजोर कर दिया। इससे पाकिस्तान के लिए संघर्ष जारी रखना मुश्किल हो गया और 10 मई 2025 तक इस्लामाबाद को युद्धविराम के लिए आग्रह करना पड़ा।

यह ताज़ा रिपोर्ट पिछले कई मीडिया रिपोर्टों और विशेषज्ञ विश्लेषणों का भी समर्थन करती है, जिनमें कहा गया है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान के कई लड़ाकू विमानों और एयर बेस को नुकसान पहुंचाया था। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत ने हवाई संघर्ष में न सिर्फ सफल कार्रवाई की बल्कि युद्ध की दिशा भी अपने पक्ष में बदल दी थी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह सफलता भारतीय वायु सेना की बेहतर रणनीति, आधुनिक तकनीक और सूक्ष्म नियोजन का परिणाम थी। इसका प्रभाव न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर दिखा, बल्कि कूटनीतिक रूप से भी पाकिस्तान को संघर्ष विराम की मांग करनी पड़ी, जो स्विस रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय बढ़त का सीधा संकेत है।

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