
मध्य पूर्व में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान टकराव के बीच कूटनीतिक हल निकालने की कोशिशें तेज होती नजर आ रही हैं। इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने महज 24 घंटे के भीतर दो बार पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का दौरा कर सभी को चौंका दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अराघची पहले पाकिस्तान से ओमान गए थे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद दोबारा इस्लामाबाद लौट आए, जिससे यह संकेत मिला कि पर्दे के पीछे कोई बड़ी कूटनीतिक हलचल चल रही है।
यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच पिछले करीब दो महीनों से तनाव चरम पर है और शांति वार्ताएं बार-बार विफल हो रही हैं। पाकिस्तान इस पूरे विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। अराघची ने इस्लामाबाद में पाकिस्तान के शीर्ष नेताओं और सेना प्रमुख से मुलाकात कर क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस यात्रा के दौरान अमेरिका के साथ कोई सीधी बातचीत तय नहीं थी।
कूटनीतिक गतिविधियों के बावजूद हालात जटिल बने हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले ही अपने प्रतिनिधियों की पाकिस्तान यात्रा रद्द कर दी थी और संकेत दिया था कि अब बातचीत केवल फोन या अप्रत्यक्ष माध्यम से ही संभव होगी। इससे यह साफ हो गया कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी बड़ी बाधा बनी हुई है।
इस बीच, खबरें यह भी हैं कि ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और संघर्ष कम करने की बात कही गई है, जबकि परमाणु मुद्दे पर बातचीत बाद में करने का सुझाव दिया गया है। लेकिन अमेरिका की ओर से परमाणु कार्यक्रम को लेकर सख्त रुख बरकरार है, जिससे समझौते की राह आसान नहीं दिख रही।
अराघची का यह दौरा केवल पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। वह इस्लामाबाद के बाद रूस जाने की तैयारी में हैं, जहां वे और समर्थन जुटाने की कोशिश करेंगे। इससे साफ है कि ईरान अब बहुपक्षीय कूटनीति के जरिए अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 24 घंटे में दो बार इस्लामाबाद लौटना यह दिखाता है कि बातचीत के कई चैनल एक साथ सक्रिय हैं, लेकिन ठोस परिणाम अभी दूर हैं। लगातार असफल वार्ताओं, परमाणु मुद्दे पर मतभेद और क्षेत्रीय तनाव के कारण यह संकट फिलहाल जल्द खत्म होता नजर नहीं आ रहा है।
कुल मिलाकर, अराघची का यह दौरा मध्य पूर्व की जटिल भू-राजनीति का अहम हिस्सा बन गया है। अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच कोई ठोस समझौता हो पाता है या फिर यह तनाव और बढ़ेगा।



