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लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा

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संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। इस प्रस्ताव पर करीब 10 घंटे तक लंबी बहस चली, जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की ओर से जवाब दिया। बहस के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली और कई बार सदन में हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। अंततः मतदान के दौरान यह प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गया और सदन की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्ष की ओर से यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किया गया था। विपक्ष का आरोप था कि लोकसभा अध्यक्ष ने कई मौकों पर निष्पक्षता नहीं बरती और सदन के संचालन में पक्षपात किया। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने स्पीकर को हटाने की मांग करते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाया था। हालांकि राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए शुरू से ही यह माना जा रहा था कि विपक्ष के पास प्रस्ताव पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन नहीं है।

बहस के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष और खासकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि लोकसभा स्पीकर पूरे सदन के होते हैं और उनकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना संसदीय परंपराओं को कमजोर करता है। शाह ने यह भी कहा कि यह कोई सामान्य घटना नहीं है, क्योंकि करीब चार दशक बाद स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि यह कदम केवल राजनीतिक लाभ और सुर्खियां बटोरने के लिए उठाया गया है।

अमित शाह ने यह भी कहा कि संसद की कार्यवाही नियमों और परंपराओं के आधार पर चलती है और स्पीकर का दायित्व होता है कि वह सदन में व्यवस्था बनाए रखें। उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि सदन कोई “मेला” नहीं है जहां कोई भी मनमर्जी से बोल सके, बल्कि यहां निर्धारित नियमों के अनुसार ही चर्चा होती है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध किया और नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए।

चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने भी विपक्ष के कदम की आलोचना की। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि स्पीकर के खिलाफ इस तरह का प्रस्ताव लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला है। वहीं भाजपा के कई सांसदों ने भी विपक्ष पर संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के बजट सत्र में राजनीतिक माहौल को और अधिक गर्म कर दिया।

अंततः जब मतदान हुआ तो भारी हंगामे के बीच ध्वनिमत से यह प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके बाद पीठासीन अधिकारी ने लोकसभा की कार्यवाही अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी। इस फैसले को कांग्रेस और विपक्ष के लिए एक राजनीतिक झटका माना जा रहा है, जबकि सरकार ने इसे संसदीय लोकतंत्र की जीत बताया है।

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