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ईरान दौरे पर गए मुनीर की कूटनीति बेअसर? तेहरान ने साफ किया

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मध्य-पूर्व में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir का तीन दिवसीय ईरान दौरा अब विवादों में घिरता नजर आ रहा है। यह दौरा ऐसे समय हुआ जब Iran और United States के बीच परमाणु कार्यक्रम और युद्धविराम को लेकर तनाव चरम पर है। शुरुआत में इस दौरे को एक बड़े कूटनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन अब सामने आ रही जानकारी से संकेत मिल रहा है कि यह पहल ज्यादा असरदार साबित नहीं हुई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुनीर का यह दौरा अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए एक “मध्यस्थता प्रयास” था। पाकिस्तान ने कोशिश की कि दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर कोई समझौता निकल सके, लेकिन तेहरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।

इससे पहले यह दावा भी किया गया था कि ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम को किसी तीसरे देश को सौंपने के लिए तैयार हो सकता है, लेकिन ईरान की ओर से ऐसे किसी ठोस समझौते की पुष्टि नहीं की गई। उल्टा, ईरानी नेतृत्व ने अपने परमाणु कार्यक्रम को “राष्ट्रीय अधिकार” बताते हुए इसे जारी रखने की बात दोहराई है।

दरअसल, हाल ही में Islamabad में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत भी बेनतीजा रही थी, जिसके बाद यह दौरा एक “आखिरी कोशिश” के रूप में देखा जा रहा था। विशेषज्ञों के मुताबिक, पाकिस्तान इस पूरे मामले में एक पुल की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच अविश्वास इतना गहरा है कि किसी ठोस नतीजे तक पहुंचना मुश्किल दिख रहा है।

इस बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता बनी हुई है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि ईरान के पास उच्च स्तर का संवर्धित यूरेनियम मौजूद है और वह अपने कार्यक्रम को “शांतिपूर्ण” बताता रहा है, जबकि पश्चिमी देश इसे सुरक्षा के लिए खतरा मानते हैं।

मुनीर के इस दौरे का एक और पहलू यह भी है कि इसे पाकिस्तान की कूटनीतिक सक्रियता के तौर पर पेश किया गया, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बड़ा ब्रेकथ्रू सामने नहीं आया। यही वजह है कि कई विश्लेषक इसे “आईवॉश” यानी केवल दिखावे की कूटनीति बता रहे हैं।

कुल मिलाकर, इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि मध्य-पूर्व में शांति की राह अभी भी बेहद कठिन है। ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर अडिग है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी इसे रोकने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और तनाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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