
सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में खुले, निवेशकों में सतर्कता का माहौल
मंगलवार, 28 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत कमजोर रही, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में खुले। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 200-250 अंकों तक गिर गया, जबकि निफ्टी 24,050 के आसपास फिसलता नजर आया। बाजार में यह गिरावट वैश्विक संकेतों की कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता के चलते देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, एशियाई बाजारों से मिले मिश्रित संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। इसके अलावा, प्रमुख केंद्रीय बैंकों—खासतौर पर बैंक ऑफ जापान और अमेरिकी फेडरल रिजर्व—के संभावित फैसलों को लेकर भी निवेशक सतर्क नजर आए।
शुरुआती गिरावट के दौरान कई प्रमुख शेयर दबाव में रहे। खासकर PSU बैंकिंग सेक्टर में कमजोरी देखने को मिली, जबकि कुछ आईटी और प्राइवेट बैंकिंग शेयर भी लाल निशान में ट्रेड करते दिखे। SBI और इंडिगो जैसे बड़े शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
हालांकि, कारोबार के दौरान बाजार में कुछ हद तक रिकवरी भी देखने को मिली। निफ्टी 24,100 के ऊपर पहुंच गया और सेंसेक्स ने भी अपने शुरुआती नुकसान को कम किया। ऑयल एंड गैस और मेटल सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखी गई, जिसमें कोल इंडिया और ONGC जैसे शेयर बढ़त में रहे।
बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली भी एक बड़ा कारण रही। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने हाल के सत्र में भारी बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने कुछ हद तक खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की।
इसके अलावा, GIFT निफ्टी के कमजोर संकेतों ने पहले ही बाजार के नकारात्मक शुरुआत के संकेत दे दिए थे। GIFT निफ्टी करीब 100 अंकों से ज्यादा नीचे ट्रेड कर रहा था, जिससे निवेशकों की धारणा पर असर पड़ा।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है, क्योंकि वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतें और केंद्रीय बैंकों के फैसले निवेशकों की दिशा तय करेंगे। फिलहाल, निवेशकों को सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, 28 अप्रैल 2026 को शेयर बाजार की शुरुआत भले ही कमजोर रही, लेकिन दिन के दौरान आई हल्की रिकवरी यह संकेत देती है कि बाजार में अभी भी खरीदारी का रुझान पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।



