
भारतीय बैडमिंटन स्टार PV Sindhu हाल ही में एक मैच के दौरान अपने सिर के पास लगे एक छोटे से डिवाइस की वजह से चर्चा में आ गईं। यह डिवाइस “Temple” नाम का एक एक्सपेरिमेंटल वियरेबल (wearable) है, जिसे खास तौर पर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और दिमागी गतिविधियों को समझने के लिए तैयार किया गया है।
दरअसल, यह छोटा-सा स्टिकर जैसा उपकरण आंख के पास, माथे के किनारे लगाया जाता है और इसका मुख्य काम दिमाग में ब्लड फ्लो (blood flow) और कॉग्निटिव लोड यानी मानसिक दबाव को ट्रैक करना होता है। यह रियल-टाइम में यह जानकारी देता है कि खिलाड़ी का दिमाग मैच के दौरान किस तरह काम कर रहा है और उस पर कितना दबाव है।
बताया जा रहा है कि “Temple” अभी पूरी तरह से बाजार में उपलब्ध प्रोडक्ट नहीं है, बल्कि यह बीटा स्टेज में चल रही एक नई तकनीक है, जिसका परीक्षण कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों के साथ किया जा रहा है। Deepinder Goyal की टीम द्वारा विकसित इस डिवाइस को सिंधु पिछले कुछ समय से ट्रेनिंग के दौरान इस्तेमाल कर रही थीं और हाल ही में इसे पहली बार मैच में भी देखा गया।
यह डिवाइस पारंपरिक फिटनेस ट्रैकर्स से अलग है। जहां सामान्य डिवाइस हार्ट रेट या स्टेप्स गिनते हैं, वहीं “Temple” सीधे दिमाग की गतिविधियों से जुड़े संकेतों को मापने की कोशिश करता है। इससे खिलाड़ियों की एकाग्रता, निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक थकान जैसे पहलुओं को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, यह डिवाइस करीब एक इंच लंबा होता है और बिना ब्लूटूथ के काम करता है। इसकी बैटरी लगभग 3-4 घंटे तक चल सकती है, जो किसी मैच या ट्रेनिंग सेशन के लिए पर्याप्त मानी जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तकनीक सफल रहती है, तो आने वाले समय में खेलों में फिटनेस के साथ-साथ “मेंटल परफॉर्मेंस” को मापने का नया युग शुरू हो सकता है। इससे कोच और खिलाड़ी यह समझ पाएंगे कि किस समय खिलाड़ी मानसिक रूप से सबसे बेहतर स्थिति में होता है और कब उसे ब्रेक या बदलाव की जरूरत है।
हालांकि, अभी इस तकनीक के उपयोग और प्रभाव को लेकर पूरी तरह स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन PV Sindhu जैसे बड़े खिलाड़ी द्वारा इसका इस्तेमाल इस बात का संकेत है कि खेलों में टेक्नोलॉजी का दायरा तेजी से बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, “Temple” केवल एक छोटा गैजेट नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी के मेल का एक नया प्रयोग है, जो भविष्य में खिलाड़ियों के प्रदर्शन को समझने और सुधारने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है।



