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दिल्ली का आक्रामक EV रोडमैप: 2028 तक 100% इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का लक्ष्य

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दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर काबू पाने और राजधानी को क्लीन मोबिलिटी की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने के लिए 2026-2030 की नई इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी का ड्राफ्ट पेश किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार ने 2028 तक राजधानी में सभी नए दोपहिया वाहनों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक बनाने का लक्ष्य रखा है। यानी 1 अप्रैल 2028 के बाद पेट्रोल से चलने वाली नई बाइक और स्कूटर का पंजीकरण बंद कर दिया जाएगा और केवल इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर ही सड़कों पर उतरेंगे।

इस नीति को देश के सबसे आक्रामक EV ट्रांजिशन प्लान्स में से एक माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य है कि राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को तेजी से कम किया जाए, क्योंकि दिल्ली के कुल प्रदूषण में लगभग 23% योगदान वाहनों का है। इसीलिए सरकार चरणबद्ध तरीके से 2027 तक तीनपहिया और 2028 तक दोपहिया वाहनों को पूरी तरह इलेक्ट्रिक करने की दिशा में बढ़ रही है।

नई EV नीति के तहत लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिए जाएंगे। इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर खरीदने पर शुरुआती चरण में प्रति kWh के हिसाब से सब्सिडी दी जाएगी, जो अधिकतम 30,000 रुपये तक हो सकती है। इसके अलावा ज्यादातर इलेक्ट्रिक वाहनों पर 2030 तक रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में 100% छूट देने का प्रस्ताव है, जिससे आम लोगों के लिए EV खरीदना काफी सस्ता हो जाएगा।

सरकार इस योजना के तहत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बड़े स्तर पर विकसित करने जा रही है। हर EV डीलर के लिए पब्लिक चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य किया जाएगा और घर या सोसाइटी में चार्जिंग पॉइंट लगाने के लिए सिंगल-विंडो क्लियरेंस की सुविधा दी जाएगी। साथ ही, बैटरी स्वैपिंग और स्क्रैपिंग पॉलिसी के जरिए पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को हटाने पर भी जोर दिया गया है।

इस पूरी योजना के लिए सरकार ने करीब 40,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का खाका तैयार किया है, जिससे EV इकोसिस्टम को मजबूत किया जा सके। इसमें चार्जिंग नेटवर्क, सब्सिडी, बैटरी मैनेजमेंट और नई टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इस लक्ष्य को हासिल करना आसान नहीं होगा। फिलहाल दिल्ली में चार्जिंग स्टेशनों की संख्या सीमित है और इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल के विकल्प भी कम हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी सुधार की जरूरत होगी।

कुल मिलाकर, दिल्ली की यह नई EV नीति न सिर्फ प्रदूषण से निपटने की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। अगर यह योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में राजधानी की सड़कों पर पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों का दबदबा देखने को मिलेगा।

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